
Gariyaband: 15 हजार के लिए मां-नवजात को 6 दिन बनाया बंधक
निजी अस्पताल की मनमानी, 5000 रुपये जमा कराने का आरोप, 3 साल के बेटे को भी रोका
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रसव के बाद एक निजी अस्पताल पर गरीब परिवार की मां, नवजात और उसके तीन साल के बेटे को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन ने 15 हजार रुपये के भुगतान के लिए परिवार को छह दिनों तक रोककर रखा।
नॉर्मल डिलीवरी के बाद शुरू हुआ विवाद
मैनपुर क्षेत्र की रहने वाली नवीना चौंदा (23 वर्ष) को प्रसव के दर्द के कारण परिवार ने धर्मगढ़ स्थित भंडारणी क्लिनिक (या बंधारणी क्लिनिक) में भर्ती कराया। यहां नॉर्मल डिलीवरी सफल रही, लेकिन अस्पताल ने 20 हजार रुपये का बिल थमा दिया। परिवार ने केवल 5 हजार रुपये ही तुरंत चुका पाए। बाकी 15 हजार रुपये का इंतजाम करने के लिए पीड़िता की सास गांव लौट गईं।
परिवार ने बताया कि वे इतनी बड़ी राशि तुरंत नहीं जुटा पाए, जिसके कारण अस्पताल प्रबंधन ने मां और नवजात शिशु को 6 दिन तक अस्पताल में ही रोककर रखा। इस दौरान उन्हें बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई, जिसे परिवार ने बंधक बनाने जैसी स्थिति करार दिया।

5000 रुपये जमा, फिर भी नहीं मिली रिहाई
परिजनों का आरोप है कि उन्होंने किसी तरह 5000 रुपये जमा कर दिए, इसके बावजूद मां और नवजात को अस्पताल से जाने नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, मां के साथ आए तीन साल के बेटे को भी अस्पताल में ही रोके रखा गया।
6 दिन तक कथित तौर पर बनाया गया बंधक
परिवार का कहना है कि पैसे पूरे न होने के कारण अस्पताल प्रबंधन ने छह दिनों तक उन्हें बाहर नहीं निकलने दिया। इस दौरान वे मानसिक तनाव में रहे और मदद के लिए लगातार गुहार लगाते रहे।
मामला उजागर होते ही मचा हड़कंप
घटना की जानकारी सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है। पीड़ित परिवार भुंजिया जनजाति से बताया जा रहा है, जिसने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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