
Gariyaband में बवासीर से ग्रसित युवक की मौत, Doctor पर पुलिस ने नहीं ली एक्शन
गरियाबंद, 27 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 20 वर्षीय युवक की बवासीर की बीमारी के चलते कथित तौर पर जान चली गई। इस मामले में स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार डॉक्टरों की लापरवाही के कारण इस दुखद घटना को टाला जा सकता था। घटना की जानकारी देते हुए मृतक के परिजनों ने बताया कि युवक पिछले कई दिनों से बीमारी से जूझ रहा था, लेकिन इलाज में देरी और चिकित्सा व्यवस्था की अनदेखी के कारण उसकी हालत बिगड़ती चली गई।

घटना का विवरण
मृतक युवक का नाम संजू राजपूत था, जो गरियाबंद जिले के एक छोटे से गांव निवासी पुरुषोत्तम धुरवा (40 वर्ष) का पुत्र था। परिजनों के अनुसार, संजू को 20 अगस्त को बवासीर की शिकायत हुई थी। शुरूआती दिनों में उसे हल्की परेशानी हुई, लेकिन स्थिति बिगड़ने पर 30 अगस्त को उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की और कुछ दवाइयां दीं, लेकिन उचित इलाज और समय पर सर्जरी की कमी के कारण उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही के चलते संजू को अत्यधिक दर्द और असहनीय स्थिति का सामना करना पड़ा।
परिजनों का आरोप
परिजनों ने बताया कि 25 अगस्त को संजू की हालत गंभीर हो गई थी। उन्होंने तत्काल उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि, मरीज की हालत में सुधार न होने के कारण परिजनों ने प्राइवेट डॉक्टर से सलाह ली। इसके बाद भी स्थिति नियंत्रण से बाहर होती चली गई। परिजनों का दावा है कि डॉक्टरों की ओर से समय पर सर्जरी न कराने और उचित देखभाल न करने की वजह से संजू की मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि मृतक के निशान पर गौर करें तो उसकी मौत के पीछे गंभीर चिकित्सा त्रुटि और देरी का हाथ हो सकता है।
पुलिस की कार्रवाई और विवाद
इस घटना के बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कोई कदम उठाने में आनाकानी कर रही है। दूसरी ओर, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों में इस घटना को लेकर आक्रोश फैल गया है, और वे मांग कर रहे हैं कि दोषी डॉक्टरों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

चिकित्सा अधिकारी का बयान
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. हर्षित चंद्रन ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मरीज को उचित इलाज के दौरान कोई लापरवाही नहीं बरती गई। फिर भी, परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की गहन जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ग्रामीणों का प्रदर्शन
इस घटना से नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के सामने प्रदर्शन किया और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने मांग की कि मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।



