March 2, 2026
Fake EWS Certificate: निजी Medical Collage में फर्जी Certificate से एडमिशन, लाखों की Fees पर उठे सवाल

Fake EWS Certificate: निजी Medical Collage में फर्जी Certificate से एडमिशन, लाखों की Fees पर उठे सवाल

Sep 11, 2025

रायपुर/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में फर्जी ईडब्ल्यूएस (Economically Weaker Section) सर्टिफिकेट के जरिए दाखिले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बिलासपुर स्थित सिम्स मेडिकल कॉलेज में तीन छात्राओं का एडमिशन रद्द कर दिया गया, क्योंकि इनके पास मौजूद ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट तहसील कार्यालयों से जारी ही नहीं हुए थे।

 

निजी कॉलेजों की भारी फीस और संदेहास्पद पात्रता

नए सत्र 2025-26 की काउंसलिंग के पहले राउंड में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के 12 छात्रों को निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस की सीटें मिली हैं।

निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस 34 से 36 लाख रुपए होती है।

अन्य खर्च मिलाकर पूरी पढ़ाई का खर्च 63 से 65 लाख रुपए तक पहुंच जाता है।

बीडीएस कोर्स की फीस भी 12 लाख रुपए से अधिक है।

इस स्थिति ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि जब किसी परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपए से कम है, तो छात्र इतनी भारी फीस कैसे वहन कर पाएंगे?

पिछले साल भी हुआ था फर्जीवाड़ा

यह पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष भी ईडब्ल्यूएस कोटे से 11 छात्रों का निजी कॉलेजों में एडमिशन हुआ था और तब भी पात्रता को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के दौरान केवल यह देखा जाता है कि सर्टिफिकेट सक्षम अधिकारी द्वारा जारी है या नहीं, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि छात्र वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का है या नहीं।

धीमी जांच प्रक्रिया

नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर की एक एमडी छात्रा का उदाहरण चर्चा में है, जिसके ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की जांच 9 महीने बाद पूरी हुई। तहसीलदार ने सर्टिफिकेट को वैलिड तो बताया, लेकिन पात्रता की पुष्टि नहीं की। इससे ईडब्ल्यूएस श्रेणी की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्रशासन की दलील

छत्तीसगढ़ चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्क्रूटिनी कमेटी एडमिशन से पहले केवल यह देखती है कि सर्टिफिकेट वैध अधिकारी द्वारा जारी किया गया है या नहीं। वास्तविक पात्रता की जांच मौके पर संभव नहीं है। शिकायत मिलने के बाद ही आगे कार्रवाई होती है।

 

शिक्षा की पारदर्शिता दांव पर

विशेषज्ञों और छात्रों का मानना है कि इस तरह के फर्जी मामले योग्य और जरूरतमंद छात्रों का हक छीन रहे हैं। ईडब्ल्यूएस का उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को उच्च शिक्षा का अवसर देना था, लेकिन फर्जी सर्टिफिकेट से इस नीति पर सवाल उठ रहे हैं।

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