
गोवा अग्निकांड में ED का बड़ा एक्शन, ‘लूथरा ब्रदर्स’ के 8 ठिकानों पर छापेमारी
नई दिल्ली/गोवा | गोवा के चर्चित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ नाइटक्लब अग्निकांड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह दिल्ली, गुरुग्राम और गोवा में एक साथ दबिश दी। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी सौरभ और गौरव लूथरा (लूथरा ब्रदर्स) के आवासीय और कार्यालय परिसरों सहित कुल 8-9 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई ने लूथरा ब्रदर्स के उस वित्तीय जाल का खुलासा किया है, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी का संदेह है।
छापेमारी में बड़ा खुलासा
ED की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि लूथरा ब्रदर्स ने 42 शेल कंपनियों का एक नेटवर्क बना रखा था। ये सभी कंपनियां दिल्ली के हडसन लेन (उत्तर पश्चिम दिल्ली) के एक ही पते पर रजिस्टर्ड पाई गई हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन कागजी कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद (लेयरिंग) किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान कई डिजिटल सबूत और दस्तावेज मिले हैं जो करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की ओर इशारा करते हैं।

गोवा से लेकर दिल्ली तक बिछी है ED की घेराबंदी
ED की टीमें सुबह से ही निम्नलिखित स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं-
- दिल्ली: किंग्सवे कैंप (आउट्रम लेन) स्थित लूथरा ब्रदर्स के कार्यालय और निवास।
- गुरुग्राम: तत्वम विला और अन्य व्यावसायिक ठिकाने।
- गोवा: अरपोरा स्थित क्लब और स्थानीय अधिकारियों के आवास।
सरकारी अधिकारियों पर भी गाज
जांच एजेंसी ने गोवा के तत्कालीन सरपंच रोशन रेडकर और पंचायत सचिव रघुवीर बागकर के ठिकानों को भी खंगाला है। इन पर आरोप है कि इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर क्लब को अवैध ट्रेड लाइसेंस और एनओसी (NOC) जारी किए थे। इसके अलावा ब्रिटिश नागरिक सुरिंदर कुमार खोसला के ठिकानों पर भी जांच चल रही है, जिन पर ‘खाजान’ भूमि (नमक बनाने वाली जमीन) के अवैध रूपांतरण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल की जांच की जा रही है, जिस पर ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब बना हुआ था।
क्या था गोवा नाइटक्लब अग्निकांड?
6 दिसंबर 2025 को गोवा के अरपोरा गांव स्थित ‘बिर्च बाय रोमियो लेन’ क्लब में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में 25 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। जांच में पाया गया कि क्लब बिना वैध फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों के चल रहा था। हादसे के तुरंत बाद लूथरा ब्रदर्स थाईलैंड फरार हो गए थे, जिन्हें बाद में 17 दिसंबर को बैंकॉक से डिपोर्ट कर भारत लाया गया। वर्तमान में दोनों भाई गोवा पुलिस की हिरासत में हैं।
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