
ED कोई ‘घूमता हथियार’ या ‘सुपर कॉप’ नहीं: मद्रास हाई कोर्ट
20 जुलाई 2025
कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई पर लगाई फटकार
मद्रास हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह कोई ‘घूमता हथियार’ या ‘ड्रोन’ नहीं है जो अपनी मर्जी से किसी भी आपराधिक गतिविधि पर हमला कर सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ईडी कोई ‘सुपर कॉप’ नहीं है जो हर मामले की जांच करने का हक रखता हो। यह टिप्पणी चेन्नई की कंपनी आरकेएम पावरजेन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें ईडी द्वारा 901 करोड़ रुपये की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) को फ्रीज करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
पीएमएलए के तहत कार्रवाई की शर्तें
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के लिए मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ (मूल अपराध) और उससे उत्पन्न ‘अपराध की आय’ (proceeds of crime) का स्पष्ट साक्ष्य होना अनिवार्य है। जस्टिस एमएस रामेश और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने जोर देकर कहा कि ईडी बिना ठोस सबूतों के मनमाने ढंग से जांच शुरू नहीं कर सकती। कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई की तुलना एक ‘लिम्पेट माइन’ से की, जो बिना ‘जहाज’ (मूल अपराध) के प्रभावी नहीं हो सकती, यानी बिना मूल अपराध के ईडी की कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हो सकती।
आरकेएम पावरजेन का मामला
यह मामला 2014 में सीबीआई द्वारा छत्तीसगढ़ में एक थर्मल पावर प्लांट के लिए कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमितता के आरोप में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) से जुड़ा है। सीबीआई ने 2017 में इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें कोई अनियमितता नहीं पाई गई थी। हालांकि, सीबीआई कोर्ट ने इस रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और कुछ पहलुओं पर आगे जांच के आदेश दिए। इसके बावजूद, ईडी ने 2015 में पीएमएलए के तहत जांच शुरू की और 31 जनवरी 2025 को 901 करोड़ रुपये की सावधि जमा को फ्रीज कर दिया, जिसे कोर्ट ने अब रद्द कर दिया।
ईडी के अधिकार क्षेत्र पर सवाल
खंडपीठ ने कहा कि पीएमएलए की धारा 66(2) के अनुसार, यदि ईडी को जांच के दौरान अन्य कानूनों के उल्लंघन का पता चलता है, तो उसे संबंधित एजेंसी को सूचित करना चाहिए, न कि स्वयं उन अपराधों की जांच शुरू कर देनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संबंधित जांच एजेंसी को ईडी द्वारा बताए गए पहलुओं में कोई मामला नहीं मिलता, तो ईडी स्वतः जांच आगे नहीं बढ़ा सकती। इस मामले में, कोर्ट ने पाया कि कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी, जिसके आधार पर ईडी की कार्रवाई को ‘कानूनी रूप से अस्थिर’ करार दिया गया।
कोर्ट का अंतिम फैसला
मद्रास हाई कोर्ट ने अपने आदेश में ईडी के 901 करोड़ रुपये की सावधि जमा को फ्रीज करने के आदेश को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि बिना मूल अपराध और अपराध की आय के ईडी का हस्तक्षेप गैरकानूनी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ईडी को केवल उन मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार है जो पीएमएलए के दायरे में आते हैं। इस फैसले को ईडी की शक्तियों पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी माना जा रहा है, जो भविष्य में इसकी कार्रवाइयों को प्रभावित कर सकता है।
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