
रविवि डाकघर घोटाले की गूंज: गबन का आंकड़ा 20 करोड़ के पार, आयोग के आदेश से मचा हड़कंप
रायपुर: राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) स्थित उप डाकघर में सामने आए बचत घोटाले ने डाक विभाग की नींद उड़ा दी है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, गबन की परतें खुलती जा रही हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, घोटाले की राशि अब 20 करोड़ रुपये की सीमा को लांघ चुकी है। इस बीच, राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा पीड़ित के पक्ष में दिए गए एक बड़े फैसले ने विभाग की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
विजिलेंस टीम में बदलाव, जांच हुई तेज
घोटाले की गंभीरता और जांच में आ रही ढिलाई को देखते हुए पोस्ट मास्टर जनरल (PMG) अजय सिंह चौहान ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में पारदर्शिता लाने के लिए विजिलेंस टीम में बड़ा फेरबदल किया गया है। प्रधान डाकघर की वरिष्ठ पोस्ट मास्टर पूजा तिवारी को नया एएसपी विजिलेंस (ASP Vigilance) नियुक्त किया गया है। अब तक हुई जांच में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए कई कर्मचारियों को रडार पर लिया गया है।
एक फैसले से विभाग में खलबली
विभाग में हड़कंप तब और मच गया जब राज्य उपभोक्ता आयोग ने पीड़ित अनिल पांडेय के हक में फैसला सुनाया। आयोग ने डाक विभाग को आदेश दिया है कि वह जमाकर्ता को 1.91 करोड़ रुपये का भुगतान करे। इस फैसले के बाद विभाग पर अब न केवल प्रशासनिक बल्कि भारी आर्थिक दबाव भी बन गया है।

अब एकजुट हो रहे अन्य पीड़ित
खबर है कि इस घोटाले की चपेट में आए अन्य जमाकर्ता भी अब चुप बैठने को तैयार नहीं हैं। अनिल पांडेय के पक्ष में आए फैसले से प्रोत्साहित होकर अन्य प्रभावित निवेशक भी एकजुट हो रहे हैं। ये निवेशक अब डाक विभाग के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में सामूहिक या अलग-अलग याचिकाएं दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो विभाग को आने वाले समय में करोड़ों रुपये के हर्जाने का सामना करना पड़ सकता है।
जांच के घेरे में कई कर्मचारी
सूत्रों का कहना है कि यह घोटाला काफी लंबे समय से चल रहा था और इसमें विभाग के अंदरूनी अधिकारियों की मिलीभगत की प्रबल आशंका है। नई विजिलेंस टीम अब पिछले 5-10 वर्षों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि गबन की अंतिम और सटीक राशि का पता लगाया जा सके।
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