
DVCM कैडर के नक्सली ने किया सरेंडर
रायपुर, 8 अक्टूबर 2025,
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है। 43 साल के एक नक्सली ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं। यह घटना 1991 में जगदलपुर जेल ब्रेक के बाद पहली बार सामने आई है, जब एक डीवीसीएम (दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी ऑफ माओवादी) कैडर ने नक्सली गतिविधियों से तौबा की है। इस कैडर ने वर्तमान में नक्सली गतिविधियों में शामिल होने से इनकार करते हुए सरेंडर कर दिया।

घटना का इतिहास और पृष्ठभूमि
इस नक्सली ने 1986 में राष्ट्रीय उद्यान दल्लम में शामिल होकर अपनी यात्रा शुरू की थी। इसके बाद उसने कम चिया और लंकापापी रेडी दल्लम जैसे क्षेत्रों में काम किया। 1987 में वह कमांडर बना और कोटा में 6 लोगों की हत्या के मामले में 1987 से 1991 तक उसने दक्षिण बस्तर के कोटा दल्लम सड़क पर कई वारदातों को अंजाम दिया। 1991 में जगदलपुर जेल ब्रेक के बाद यह नक्सली तेलंगाना दिशा बस्तर के कोटा दल्लम सड़क पर छह लोगों की हत्या के मामले में वांछित था।

सरेंडर की प्रक्रिया
इस नक्सली ने 6 लोगों की हत्या के मामले में 1988 में गोलपल्ली-मरिगुड़ा हत्या मामले में भी शमिल रहा। जुलाई 2020 में सीआरपीएफ जवानों पर हमले के बाद नक्सलियों ने इस घटना को कबूल किया। नक्सली जवानों के हथियार लूटने और 9 घायल जवानों को निशाना बनाने की घटना में भी इस शख्स का हाथ रहा। 8 पुलिस जवानों की हत्या के आरोप में यह नक्सली वांछित था। 1987 में इसकी एक कमेटी का गठन हुआ था, जिसके बाद 1990 में रामता के साथ तेलंगाना जाने के लिए हथियारों को तैयार किया गया।
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