
Chhattisgarh: आर्थिक तंगी से जूझ रहे पति-पत्नी ने की आत्महत्या, भाई-भाभी के तानों से तंग आकर छोड़ दिया था घर
रायपुर, 01 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के एक गांव में आर्थिक तंगी और सामाजिक तानों से परेशान एक दंपति ने आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। मृतक दंपति, जिनकी पहचान रमेश और सुनीता (बदले हुए नाम) के रूप में हुई है, ने अपने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। पुलिस के अनुसार, दंपति ने यह कदम भाई-भाभी के लगातार तानों और आर्थिक तंगी के कारण उठाया।

आर्थिक तंगी ने बढ़ाया मानसिक दबाव
जानकारी के अनुसार, रमेश और सुनीता पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे थे। रमेश एक छोटे-मोटे दिहाड़ी मजदूर थे, जबकि सुनीता घरेलू कामों में परिवार का सहारा देती थीं। परिवार की आय इतनी कम थी कि दोनों का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। कर्ज का बोझ और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती ने उनके मानसिक दबाव को और बढ़ा दिया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि दंपति ने कई बार अपने रिश्तेदारों से आर्थिक मदद मांगी, लेकिन उन्हें कोई सहारा नहीं मिला।

भाई-भाभी के तानों ने तोड़ा हौसला
पुलिस जांच में सामने आया कि रमेश और सुनीता अपने भाई और भाभी के साथ एक ही घर में रहते थे। लेकिन भाई-भाभी द्वारा लगातार ताने और अपमानजनक व्यवहार ने दंपति को मानसिक रूप से तोड़ दिया। पड़ोसियों के अनुसार, भाई-भाभी अक्सर रमेश और सुनीता को उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर ताने मारते थे और उन्हें घर में बोझ की तरह देखते थे। इस अपमान से तंग आकर दंपति ने कुछ महीने पहले ही घर छोड़ दिया था और किराए के एक छोटे से मकान में रहने लगे थे। लेकिन आर्थिक स्थिति और खराब होने के कारण उनकी परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही थीं।
सुसाइड नोट में बयां किया दर्द
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला, जिसमें दंपति ने अपनी परेशानियों का जिक्र किया था। नोट में उन्होंने आर्थिक तंगी और भाई-भाभी के तानों को अपनी आत्महत्या का कारण बताया। पुलिस ने इस मामले में भाई-भाभी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है और जांच शुरू कर दी है।
समाज और प्रशासन के लिए सवाल
यह घटना समाज और प्रशासन के लिए कई सवाल खड़े करती है। आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। छत्तीसगढ़ में पहले भी कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां आर्थिक संकट ने लोगों को आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
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