
दुर्ग में साइबर ठगी: दो बुजुर्गों से 4.70 लाख रुपये की धोखाधड़ी
दुर्ग। जिले में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन ठगों पर कार्रवाई के मामले न के बराबर हैं। ताजा घटनाक्रम भिलाई से सामने आया है, जहां जामुल और सुपेला थाना क्षेत्र के दो बुजुर्गों को साइबर ठगों ने निशाना बनाया। दोनों के बैंक खातों से कुल 4.70 लाख रुपये उड़ा लिए गए। ठगी का तरीका एक जैसा था, जिसमें ठगों ने खुद को बैंक का कस्टमर केयर अधिकारी बताकर पीड़ितों को झांसा दिया। पुलिस ने दोनों मामलों में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
SBI Yono App Update के नाम पर ठगी
दोनों पीड़ित अपने एसबीआई योनो एप को अपडेट करने की प्रक्रिया में थे, तभी ठगों ने उन्हें फोन कर जाल में फंसाया। कॉलर ने खुद को बैंक अधिकारी बताते हुए व्हाट्सएप पर एक फर्जी लिंक भेजा। लिंक के जरिए पीड़ितों से उनकी बैंक डिटेल्स हासिल की गईं। हैरानी की बात यह है कि बिना ओटीपी साझा किए ही ठगों ने उनके खातों से लाखों रुपये ट्रांसफर कर लिए।
सुपेला में 1.90 लाख की ठगी
सुपेला थाना क्षेत्र के नेहरू नगर पश्चिम निवासी राजेश कुमार पांडेय इस ठगी के पहले शिकार बने। उनका सेक्टर-4 स्थित एसबीआई शाखा में बचत खाता है। 26 जून को सुबह उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने योनो एप अपडेट करने के लिए एक लिंक भेजा। राजेश ने जैसे ही लिंक पर डिटेल्स भरी, उनके खाते से 1.90 लाख रुपये गायब हो गए।

जामुल में रिटायर्ड मैनेजर से 2.80 लाख की चपत
दूसरा मामला जामुल थाना क्षेत्र का है, जहां हाउसिंग बोर्ड निवासी 85 वर्षीय रमाशंकर पांडेय को ठगों ने निशाना बनाया। रमाशंकर माइंस विभाग के रिटायर्ड मैनेजर हैं। ठगों ने उसी पैटर्न का इस्तेमाल कर उनके खाते से 2.80 लाख रुपये उड़ा लिए। रमाशंकर ने भी योनो एप अपडेट करने के लिए भेजे गए लिंक पर अपनी डिटेल्स साझा की थीं।
पुलिस ने शुरू की जांच
दोनों मामलों में सुपेला और जामुल थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है। पुलिस अब ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए फोन नंबर और लिंक के सोर्स को ट्रेस करने में जुटी है। साइबर क्राइम सेल की मदद से ठगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच कार्रवाई की धीमी रफ्तार पीड़ितों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
साइबर ठगी से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान नंबरों से आने वाले कॉल और लिंक पर भरोसा न करें। बैंक कभी भी फोन या व्हाट्सएप के जरिए संवेदनशील जानकारी नहीं मांगते। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या डिटेल्स साझा करने से पहले बैंक से संपर्क कर पुष्टि कर लें।
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