
ध्वनि प्रदूषण पर High Court का फैसला, कबाड़ी कारोबार को मिली राहत
24 सितंबर 2025, सुबह 8:25 बजे: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए ध्वनि प्रदूषण के मुद्दे पर कबाड़ी कारोबार को राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने 14 अगस्त को आयोजित बैठक के दौरान, समिति के सुझावों और पर्यावरण मंडल द्वारा प्रस्तुत कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के प्रावधानों के आधार पर यह फैसला सुनाया। इस बैठक में उपस्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि कबाड़ी कारोबार को संचालित करने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते इसके लिए सख्त दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि कबाड़ी कारोबार से उत्पन्न होने वाले ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए समिति द्वारा अनुशासित प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इस संदर्भ में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, जिसमें 15 सितंबर 2025 को अगली बैठक में प्रस्तुत किए जाने वाले विवरण शामिल हैं। यह बैठक पर्यावरण संरक्षण मंडल और संबंधित विभागों के बीच आयोजित की जाएगी, जिसमें कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के तहत और सख्त नियमों पर विचार-विमर्श होगा।
कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और इसके प्रावधान
कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 एक ऐसा कानून है जो ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने और इसके दुष्प्रभावों से समाज को बचाने के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम के तहत, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण की सीमा निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट ने इस अधिनियम के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि कबाड़ी कारोबार से होने वाला शोर स्तर निर्धारित सीमा के भीतर रहे। इसके लिए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रायपुर में हुई पिछली बैठक और समिति की सिफारिशें
रायपुर में आयोजित पिछले सत्र में, पर्यावरण संरक्षण मंडल की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में यह सुझाव दिया गया कि कबाड़ी कारोबार को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय, इसके संचालन को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इस बैठक में यह भी चर्चा हुई कि 2000 के महानगर कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 के आधार पर संशोधन हेतु कदम उठाए जाएं, जिससे शहरी क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सके। इसके अलावा, रायपुर प्रशासन को इस मामले पर सख्त निगरानी रखने और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
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