
Dhamtari:मगरलोड भर्ती घोटाला फिर सुर्खियों में: तीन आरोपी गिरफ्तार
धमतरी। जिले का कुख्यात मगरलोड भर्ती घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। साल 2007 में हुई शिक्षाकर्मी भर्ती में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था, और अब इस मामले में पुलिस ने ताजा कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस घोटाले ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए, बल्कि कई योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का भी हनन किया।

150 के बजाय 172 नियुक्तियाँ, फर्जी दस्तावेजों का खेल
2007 में मगरलोड में शिक्षाकर्मी श्रेणी-3 की भर्ती के लिए 150 पद स्वीकृत किए गए थे, लेकिन जांच में सामने आया कि 172 नियुक्तियाँ की गईं। कई अपात्र उम्मीदवारों को फर्जी अंकतालिका, अनुभव पत्र और झूठे प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी दी गई। इस घोटाले में चयन समिति के सदस्यों की मिलीभगत की बात सामने आई, जिसने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
2011 में उजागर हुआ मामला, धीमी पड़ी जांच
यह घोटाला 2011 में तब उजागर हुआ, जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस और सीआईडी ने जांच शुरू की, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी रही। कई सालों तक मामला ठंडे बस्ते में रहा, जिससे पीड़ित उम्मीदवारों में निराशा बढ़ती गई। स्थानीय लोगों ने भी समय-समय पर इस मामले में न्याय की मांग उठाई।
पुलिस की ताजा कार्रवाई, तीन गिरफ्तार
हाल ही में पुलिस ने इस मामले में नया कदम उठाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें सीताराम कुर्रे, इशू कुमार साहू और तत्कालीन जनपद उपाध्यक्ष कोमल यादव शामिल हैं। ये तीनों उस चयन समिति के सदस्य थे, जिसने भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया था। हालांकि, ये लोग अब किसी पद पर नहीं हैं, लेकिन जांच में पुख्ता सबूत मिलने के बाद इन्हें हिरासत में लिया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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