
दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: खाते के फ्रीज़ होने से चेक बाउंस हुआ तो नहीं चलेगा धारा 138 के तहत केस
नई दिल्ली, जून 2025:
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में चेक बाउंस मामलों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि यदि ड्रॉअर (चेक जारी करने वाले व्यक्ति) के बैंक खाते को चेक जारी करने के बाद फ्रीज़ कर दिया गया हो, और इस कारण चेक का भुगतान नहीं हो पाया, तो ऐसे मामले में धारा 138, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) के तहत अभियोजन नहीं किया जा सकता।
यह फैसला न्यायमूर्ति अमित माहाजन की एकल पीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि चेक के निष्पादन के समय खाते में पर्याप्त राशि थी, लेकिन बाद में खाते को किसी कारणवश फ्रीज़ कर दिया गया, तो इसे जानबूझकर भुगतान न करने की मंशा नहीं माना जा सकता। ऐसे में यह धारा 138 एनआई एक्ट के दायरे में नहीं आता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चेक बाउंस की स्थिति तभी अपराध मानी जाएगी जब वह जानबूझकर या धोखाधड़ी की मंशा से हो। लेकिन अगर चेक जारी करने के बाद बैंक अकाउंट को किसी अलग कारण से जब्त किया गया हो और उससे भुगतान नहीं हो सका, तो इसे अभियोज्य अपराध नहीं ठहराया जा सकता।
यह निर्णय ऐसे मामलों में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है जहां कई बार बैंकों द्वारा अकाउंट फ्रीज़ होने के कारण तकनीकी रूप से चेक बाउंस हो जाते हैं और चेक जारी करने वाले को गलत तरीके से कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
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