
दिल्ली : गैंगस्टर नीरज बवाना को पत्नी की बीमारी के चलते एक दिन की कस्टडी पेरोल
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुख्यात गैंगस्टर नीरज बवाना को उनकी गंभीर रूप से बीमार पत्नी से मिलने और सर्जरी के लिए सहमति प्रदान करने हेतु एक दिन की कस्टडी पेरोल दी है। सोमवार को न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने नीरज सहरावत उर्फ बवाना को 1 जुलाई को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक कस्टडी पेरोल देने का आदेश दिया। अदालत ने सख्त हिदायत दी कि इस दौरान नीरज केवल अपनी पत्नी और संबंधित डॉक्टर से मिल सकेंगे, किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क की अनुमति नहीं होगी। साथ ही, जेल अधीक्षक को इस अवधि में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
नीरज बवाना की पत्नी वर्तमान में पांडव नगर के मेहता अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक (एपीपी) लक्ष्य खन्ना ने अंतरिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली में गैंगवार की आशंका बनी हुई है, और हाल ही में एक हत्या की घटना भी सामने आई है। खन्ना ने कहा कि नीरज बवाना एक खतरनाक अपराधी है, और जमानत मिलने पर वह समाज के लिए खतरा बन सकता है या फरार हो सकता है।
नीरज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन हरिहरन और अधिवक्ता सिद्धार्थ ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को कम से कम दो दिन की कस्टडी पेरोल दी जाए, ताकि वह अपनी पत्नी की देखभाल और सर्जरी से संबंधित औपचारिकताएं पूरी कर सकें। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एक दिन की पेरोल पर्याप्त है, क्योंकि नीरज को केवल अपनी पत्नी से मिलने और सर्जरी के लिए जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की जरूरत है, और इसके लिए कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।
छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग
नीरज बवाना ने अपनी याचिका में छह सप्ताह की अंतरिम जमानत की मांग की थी। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी की हालत गंभीर है और उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता है। नीरज ने यह भी कहा कि वह 2015 से एक आपराधिक मामले में हिरासत में हैं, और मुकदमे की सुनवाई में देरी हो रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि उनकी शादी 2012 में हुई थी, और लंबे समय तक जेल में रहने के कारण उनकी पत्नी देखभाल से वंचित रही है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि नीरज की नियमित जमानत याचिका जनवरी में हाई कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। पुलिस ने नीरज को एक खतरनाक अपराधी बताते हुए जमानत देने से इनकार करने की मांग की।
कड़ी सुरक्षा के साथ पेरोल
अदालत ने कस्टडी पेरोल के दौरान कड़े सुरक्षा इंतजामों का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह निर्णय नीरज की पत्नी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर लिया गया है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि नीरज की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
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