
Delhi दंगों के मामले में प्रमुख आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम समेत आठ की जमानत याचिका खारिज
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2020 दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले में प्रमुख आरोपियों समेत कई लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह मामला FIR संख्या 59/2020 के तहत दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने दर्ज किया था, जिसमें आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) और अवैध गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर धाराओं का आरोप है। इस मामले में आरोपी राष्ट्रीय स्तर पर हिंसा और दंगे भड़काने के लिए कथित साजिश रचने के आरोपी हैं।

आरोपियों के नाम और गिरफ्तारी की तिथियां
- शरजील इमाम – 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया। उनका दावा था कि वे साजिश से जुड़ा नही हैं और उनका कार्य बिहार में दिया गया भाषण 23 जनवरी 2020 के बाद समाप्त हो गया।
- उमर खालिद – 13 सितंबर 2020 को हिरासत में लिए गए। उनकी ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ कोई गुप्त बैठक या षड़यंत्र के साक्ष्य नहीं हैं, और केवल व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल होना या संदेश भेजना आरोप की पूरी व्याख्या नहीं है।
- अथर खान – 29 जून 2020 को गिरफ्तार। जमानत की मांग की गई लेकिन अदालत ने गंभीर साजिश के आरोपों को देखते हुए इन्हें मना कर दिया।
- खालिद सैफी – 26 फरवरी 2020 को गिरफ्तार, जिन्होंने पहले कुछ सहअभियुक्तों के जमानती होने का हवाला देते हुए समानता (Parity) के आधार पर जमानत मांगी थी।
- मोहम्मद सलीम खान – 24 जून 2020 को गिरफ्तार, दंगों में कथित रूप से सक्रिय भूमिका के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
- शिफा उर रहमान – 26 अप्रैल 2020 को हिरासत में लिए गए।
- मीरान हायदर – 1 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार, साजिश और दंगे भड़काने में शामिल आरोप।
- गुलफिशा फातिमा – 4 अप्रैल 2020 को हिरासत में ली गईं।
- शादाब अहमद – 11 जून 2020 को गिरफ्तार।
अन्य आरोपी
मामले में ताहिर हुसैन, इशरत जहां, आसिफ इकबाल तहना, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, साफूरा ज़रगर, फैजान खान, मालय कुमार और नताशा नारवाल भी आरोपी हैं।
कोर्ट में बहस और फैसले का कारण
अदालत के सामने आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि व्हाट्सएप ग्रुप में सदस्यों की उपस्थिति या सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों की चर्चा को साजिश कहना न्यायसंगत नहीं है। साथ ही, उमर खालिद और शरजील इमाम का कहना था कि उनके खिलाफ कोई ठोस साजिश या हिंसा भड़काने वाली गतिविधि साबित नहीं हुई।
विपक्ष में दिल्ली पुलिस की ओर से विशेष सरकारी वकील तुषार मेहता ने कहा कि जो भी देश के खिलाफ कार्य कर रहे हैं, उन्हें बरी होने तक जेल में रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों ने विशेष दिन चुना था ताकि दंगे और आगजनी को और भड़काया जा सके, जिससे देश की छवि को वैश्विक स्तर पर नुकसान पहुंचे।

इन तर्कों को न्यायालय ने गंभीरता से लिया और मामलों की नाज़ुकता व राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह दंगा मामले में चल रही जांच और न्यायिक प्रक्रिया की समाप्ति तक उनके जेल में ही रहने का संकेत देता है।
यह मामला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े कई संवेदनशील और गंभीर साजिश आरोपों वाला हाई-प्रोफाइल केस है, जिस पर अभी भी व्यापक न्यायिक जांच चल रही है।
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