
दस्त के नए मामले सामने आए, स्वास्थ्य सचिव को High Court का आदेश
Chhattisgarh के कई हिस्सों में दस्त (डायरिया) के नए मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। बढ़ते मामलों को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति और सरकार के प्रयासों की समीक्षा के लिए उठाया गया है।

दस्त के मामले बढ़े, जनता में चिंता
पिछले कुछ हफ्तों में, विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में दस्त के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी, खराब स्वच्छता और मौसमी बदलाव इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई अस्पतालों में बेड की कमी और दवाइयों की आपूर्ति में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था में कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है। एक प्रभावित व्यक्ति, रामप्रसाद, ने कहा, “हमारे क्षेत्र में पानी की टंकी महीनों से साफ नहीं हुई, और अब बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं।”
हाई कोर्ट का सख्त रुख
दस्त के बढ़ते मामलों को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, हाई कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को तलब किया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर इस मामले में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दें। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि दस्त के प्रकोप को रोकने के लिए तत्काल कदम क्यों नहीं उठाए गए।
न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, “स्वास्थ्य एक मौलिक अधिकार है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण प्रदान करे। इन मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। दस्त के मामलों की निगरानी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं, और प्रभावित क्षेत्रों में मुफ्त दवाइयां और ओआरएस (Oral Rehydration Solution) वितरित किए जा रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि स्वच्छता अभियान को और तेज किया जाएगा।
आगे की राह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार से मांग की है कि दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपाय किए जाएं। इनमें स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, नियमित जल स्रोतों की सफाई और जन जागरूकता अभियान शामिल हैं।
👉 हमारे WhatsApp channel से जुड़ने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें👇👇
https://whatsapp.com/channel/0029VbALQC677qVNwdR5Le3V



