
रायपुर में 2.83 करोड़ की साइबर ठगी: डिजिटल अरेस्ट का नया मामला
घटना का विवरण
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक 63 वर्षीय महिला के साथ 2 करोड़ 83 लाख रुपये की साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ठगों ने महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उनके बैंक खातों से भारी राशि ट्रांसफर करवा ली। यह घटना साइबर अपराधियों की नई रणनीति को दर्शाती है, जिसमें वे पीड़ितों को मानसिक दबाव में लाकर ठगी को अंजाम देते हैं।
ठगी का तरीका
साइबर अपराधियों ने खुद को दिल्ली पुलिस के अधिकारी बताकर पीड़िता, सैफायर ग्रीन कॉलोनी निवासी सोनिया हंसपाल, को वीडियो कॉल के जरिए डराया। उन्होंने दावा किया कि महिला का नाम मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में शामिल है और डिजिटल अरेस्ट कर लिया जाएगा। डर और दबाव में आकर महिला ने ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में 20 दिनों तक धीरे-धीरे 2.83 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए।
ठगों का झांसा
ठगों ने पीड़िता को यह विश्वास दिलाया कि उनके बैंक खाते से अवैध गतिविधियां हो रही हैं। एक कॉल में, ठग ने महिला को बताया कि उनके साथ फ्रॉड हो गया है, जिसके बाद उन्हें और पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। इस तरह की ठगी में अपराधी पीड़ितों को लंबे समय तक डिजिटल संपर्क में रखकर उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई
मामले का खुलासा होने पर सोनिया हंसपाल ने रायपुर के विधानसभा थाने में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने साइबर क्राइम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अभी तक ठगों की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस विभिन्न बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। रायपुर पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
साइबर ठगी से बचाव
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे फर्जी कॉल्स से सावधान रहें। किसी भी अनजान कॉलर पर भरोसा करने से पहले उनकी पहचान की पुष्टि करें और पैसे ट्रांसफर करने से बचें। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को अपने बैंक खातों और व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
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