
भारत में साइबर धोखाधड़ी की महामारी: सरकार के अनुसार 2024 में ₹22,845 करोड़ की हानि, पिछले वर्ष की तुलना में 206% की बढ़ोतरी।
साइबर अपराधों में 206% की वृद्धि
भारत में साइबर ठगी ने 2024 में विकराल रूप ले लिया है। सरकार के अनुसार, पिछले वर्ष देश भर में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के कारण नागरिकों को 22,845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जो 2023 की तुलना में 206% अधिक है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने बताया कि मई 2024 में औसतन 7,000 साइबर अपराध की शिकायतें प्रतिदिन दर्ज की गईं। इनमें से 85% मामले वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित थे। यह आंकड़ा 2021-2023 के बीच 113.7% और 2022-2023 के बीच 60.9% की वृद्धि दर्शाता है।
डिजिटल अरेस्ट और नए खतरे
साइबर अपराधी अब ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए हथकंडे अपना रहे हैं। बेलगावी, कर्नाटक में एक बुजुर्ग दंपती ने साइबर ठगों द्वारा 50 लाख रुपये की ठगी और मानसिक उत्पीड़न के बाद आत्महत्या कर ली। ठगों ने टेलीकॉम अधिकारियों के रूप में फर्जी कॉल कर दंपती को डराया और पैसे ऐंठे।

सरकार का जवाब और चुनौतियां
गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें साइबर कमांडो की नियुक्ति और साइबर पुलिस इकाइयों को प्रशिक्षण शामिल है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और ‘CyTrain’ जैसे ऑनलाइन कोर्स प्लेटफॉर्म भी शुरू किए गए हैं। हालांकि, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्वीकार किया कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए पुलिस की क्षमता में सुधार की आवश्यकता है।
जनता के लिए सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठगी से बचने के लिए जनता को सतर्क रहना होगा। संदिग्ध कॉल्स या मैसेज पर तुरंत विश्वास न करें और ऐसी घटनाओं की शिकायत तुरंत पुलिस को करें। सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि वे साइबर जागरूकता बढ़ाएं और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाएं।एं।
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