
Client से Advocate की फीस वसूली पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: एडवोकेट-क्लाइंट संबंध संविदात्मक, रिट याचिका नहीं होगी स्वीकार
जबलपुर, मध्यप्रदेश — मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि वकील और मुवक्किल के बीच का रिश्ता एक संविदात्मक (contractual) संबंध है। इस आधार पर यदि वकील अपनी फीस की वसूली करना चाहता है, तो इसके लिए रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
यह निर्णय न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने एक वकील की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने अपनी सेवाओं के बदले फीस की मांग करते हुए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी।
अदालत ने कहा कि वकील और क्लाइंट के बीच हुआ समझौता एक निजी अनुबंध है और इसमें किसी भी पक्ष के अधिकारों और दायित्वों का निर्धारण सिविल प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, न कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत।
मुख्य बिंदु:
- वकील-क्लाइंट संबंध संविदात्मक होता है, संवैधानिक अधिकार का मामला नहीं।
- फीस वसूली के लिए दीवानी अदालत में दावा करना उचित उपाय है।
- रिट याचिका इस प्रकार के मामलों में विचार योग्य नहीं मानी जाएगी।
यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह वकीलों और मुवक्किलों दोनों के लिए स्पष्टता प्रदान करता है कि सेवा शुल्क संबंधित विवाद किस मंच पर सुलझाए जाने चाहिए।
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