
आधार निवास का प्रमाण, नागरिकता का नहीं: SIR पर कपिल सिब्बल की दलीलों पर CJI की दो टूक
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को SIR (स्टेटस ऑफ इन्डिविजुअल रजिस्टर) से जुड़ी सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट कहा कि आधार कार्ड केवल निवास (Residence) का प्रमाण है, नागरिकता (Citizenship) का नहीं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आधार को नागरिकता का दस्तावेज साबित करने की कोई कानूनी आधारभूमि नहीं है
कपिल सिब्बल ने उठाई नागरिकता से जुड़ी चिंताएँ
सुनवाई में कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि SIR को लागू किया गया, तो कई लोगों के सामने नागरिकता साबित करने की चुनौती खड़ी हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि आमतौर पर सरकार आधार, राशन कार्ड या अन्य पहचान पत्रों के आधार पर नागरिकता के अनुमान लगाती है, जबकि इनमें से कोई भी दस्तावेज नागरिकता प्रमाणित नहीं करता।

CJI की साफ टिप्पणी: “आधार = नागरिकता नहीं”
कपिल सिब्बल की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJI ने कहा:
“आधार सिर्फ निवास का प्रमाण है। इसे नागरिकता प्रमाणित करने के लिए नहीं बनाया गया है। देश में हर व्यक्ति के पास आधार हो सकता है, लेकिन इससे वह नागरिक साबित नहीं हो जाता।”
कोर्ट की यह टिप्पणी SIR को लेकर चल रही गलतफहमियों को दूर करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
SIR स्कीम पर सरकार और याचिकाकर्ताओं में तकरार
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रस्तुत दलीलों में कहा गया कि SIR नागरिकता सत्यापन की कोई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह केवल व्यक्तियों के मूलभूत विवरणों को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाई गई एक प्रशासनिक व्यवस्था है।
दूसरी ओर याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था नागरिकता संबंधी प्रश्नों को जटिल बना सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए
CJI ने यह भी कहा कि किसी भी ऐसी प्रणाली को लागू करते समय सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि आम नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न पड़े और किसी को भी दस्तावेजों के अभाव में परेशान न किया जाए
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