
Chhattishgarh सरकार की नई नीति: आत्मसमर्पित महिला माओवादियों के लिए मुफ्त IVF उपचार
Chhattisgarh सरकार ने नई Naxalite Surrender, Victim Relief, and Rehabilitation Policy 2025 के तहत आत्मसमर्पण कर चुकी महिला माओवादी कार्यकर्ताओं को संतान उत्पत्ति में सहायता देने के लिए पूरी तरह से वित्तपोषित IVF उपचार का प्रावधान किया है.

नीति के प्रमुख पहलु
दशकों तक Bastar सहित माओवादी प्रभावित क्षेत्र में महिला और पुरुष कैडरों की शादी से पहले अनिवार्य नसबंदी (vasectomy) कराई जाती थी, ताकि वे परिवार बढ़ाने के “झंझट” से दूर रह सकें.
कई पूर्व माओवादी आत्मसमर्पण के बाद परिवार बढ़ाने की इच्छा रखते हैं, लेकिन असुरक्षित और अपूर्ण नसबंदी के बाद, reversal surgery अक्सर कामयाब नहीं हो पाती.
राज्य के आंकड़ों के अनुसार, 2007 से अब तक ऐसी 26 सर्जरी हुईं, जिसमें सिर्फ 10 दंपत्ति ही पिता-माता बन सके.
इस समस्या को हल करने के लिए नए नीति में IVF (In-vitro fertilisation) का विकल्प शामिल किया गया है. सरकार IVF का पूरा खर्च उठाएगी, ताकि पूर्व माओवादी महिलाएं यदि चाहें तो संतान सुख प्राप्त कर सकें.

पुनर्वास और सामाजिक सशक्तीकरण
यह नीति माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद सामान्य जीवन तथा परिवार के निर्माण की इच्छा को सम्मान देने के लिए बनाई गई है.
राज्य सरकार की योजना है कि पूर्व माओवादियों को अन्य मदद जैसे मासिक वजीफा, आवास, भूमि, स्किल ट्रेनिंग, और सामाजिक सशक्तीकरण के अवसर भी मिलें.
जिलास्तरीय कमिटी इसकी मॉनिटरिंग करेंगी, और प्रत्येक लाभार्थी का विशिष्ट पहचान पत्र बनेगा.
विधिवत प्रक्रिया और उन्नत प्रयास
राज्य के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा के अनुसार, कई महिला व पुरुष कैडर reversal surgery के बाद भी माता-पिता नहीं बन पाए— इसलिए IVF एक न्यायसंगत और संवेदनशील विकल्प है.
इस कदम को पूर्व माओवादियों की भावनात्मक व सामाजिक पुनर्वास का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे वे मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित हो सकें.
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