
Chhattishgarh परिवहन विभाग: 350 करोड़ के राजस्व वाले विभाग में केवल 464 कर्मचारी, जिम्मेदारियों का भारी बोझ
अमले की भारी कमी से जूझ रहा परिवहन विभाग
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले विभागों में से एक है परिवहन विभाग, जो हर साल औसतन 200 से 350 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को देता है। बावजूद इसके, विभाग पिछले लंबे समय से भारी स्टाफ की कमी की समस्या से जूझ रहा है। विभागीय सेटअप के अनुसार स्वीकृत 1154 पदों के मुकाबले सिर्फ 464 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, यानी 40 फीसदी कर्मचारी ही व्यवस्था को संभाल रहे हैं।

जिम्मेदारियों का बढ़ता बोझ
अमले की कमी के कारण मुख्यालय से लेकर फील्ड तक लिपिकीय, आरक्षक और वाहन चालक जैसे कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, जिसमें विभागीय कार्य के साथ-साथ अन्य प्रभार भी शामिल हैं। स्थिति इस हद तक पहुँच गई है कि अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी मदद ली जा रही है, ताकि विभागीय कामकाज प्रभावित न हो।

भर्ती प्रक्रिया में देरी और नई पहल
परिवहन विभाग में जल्द ही आरक्षकों के 50 नए पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है। इसके लिए व्यापम द्वारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। राज्य सरकार को पहले ही 210 आरक्षक पदों की रिक्ति का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसकी स्वीकृति के बाद अब भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अपर परिवहन आयुक्त डी रविशंकर के अनुसार, अमले की इस कमी से विभाग को बहुत जल्द राहत मिलने की संभावना है।

विभाग का राजस्व और महत्व
विभाग को होने वाली आय मुख्य रूप से राज्य परिवहन प्राधिकरण, आरटीओ, चेकपोस्ट, और प्रिवेंशन टीम के जरिए होती है। सबसे बड़ा हिस्सा वाहन बिक्री टैक्स और मोटरयान अधिनियम के तहत वसूली का है। राजस्व हर वर्ष बढ़ रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी विभागीय कार्यक्षमता के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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