
छत्तीसगढ़ में NHM कर्मचारियों की नौकरी बचाने की मांग
छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का संकट
दिनांक 02 सितंबर 2025 को सुबह 8:24 बजे, छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से एक गंभीर चिंता का विषय सामने आया है। राज्य के रायपुर, बिलासपुर, और अन्य कई जिलों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत 100 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन कर्मचारियों ने अपनी आजीविका और परिवारों के भरण-पोषण के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यह मुद्दा न केवल इन कर्मचारियों के जीवन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी गहरा असर डाल रहा है।

नौकरी पर संकट और कर्मचारियों की मांग
एनएचएम के तहत कार्यरत इन कर्मचारियों को पिछले कुछ महीनों से वेतन भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों को यह सूचना दी गई है कि उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं, जिससे उनके सामने बेरोजगारी का खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि उनकी नौकरियों को सुरक्षित रखा जाए और बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का महत्व
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मिशन के तहत कार्यरत कर्मचारी, जैसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा दीदी, और अन्य सहायक कर्मचारी, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त होने से न केवल इनके परिवारों पर आर्थिक संकट पड़ेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों। विशेष रूप से, मलेरिया, कुपोषण, और मातृ-शिशु स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में इनकी भूमिका अहम है।

सरकार की ओर से कार्रवाई की उम्मीद
कर्मचारी संगठनों ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. श्याम बिहारी जायसवाल से मिलकर अपनी समस्याओं को उठाया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार तुरंत कदम उठाए और इन कर्मचारियों की नौकरी को बचाने के लिए ठोस योजना बनाए। इसके साथ ही, संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि बकाया वेतन भुगतान के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय की जाए, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके।
जन आंदोलन की शुरुआत
इस संकट को देखते हुए, कर्मचारी और उनके समर्थक अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। रायपुर और बिलासपुर में कई संगठनों ने मिलकर एक संयुक्त प्रदर्शन की योजना बनाई है, जिसमें वे अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठाएंगे। इस प्रदर्शन में स्थानीय नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के भी शामिल होने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर हड़ताल करेंगे, जो स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावित कर सकता है।
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