
Chhattisgarh कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में संशोधन की तैयारी DJ शोर से नाबालिग की मौत पर हाईकोर्ट सख्त
बिलासपुर, 10 सितंबर 2025 छत्तीसगढ़ में डीजे और साउंड बॉक्स से उत्पन्न होने वाले अत्यधिक शोर के कारण आम जनता को हो रही परेशानियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन करने की दिशा में कदम उठा रही है। मंगलवार को बिलासपुर हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर जनहित याचिका पर हुई सुनवाई में राज्य शासन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कानून में कड़े प्रावधानों की कमी के कारण अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।

बलरामपुर की दर्दनाक घटना ने खोला शोर प्रदूषण का पिटारा
सुनवाई के दौरान कोर्ट का ध्यान विशेष रूप से बलरामपुर जिले में गणेश विसर्जन के दौरान हुई एक हृदयविदारक घटना पर गया। यहां डीजे की तेज ध्वनि पर नाचते हुए एक नाबालिग लड़की की अचानक मौत हो गई। यह घटना न केवल शोर प्रदूषण के खतरे को उजागर करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे धार्मिक आयोजनों या उत्सवों के ना/ पर बिना किसी नियंत्रण के साउंड सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, विसर्जन जुलूस के दौरान डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग भी परेशान हो रहे थे। नाबालिग लड़की, जो जुलूस में शामिल थी, अचानक बेहोश हो गई और अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उसकी मौत हो गई। चिकित्सकों ने मौत का कारण हृदयाघात बताया, जो शोर के कारण उत्पन्न तनाव से जुड़ा माना जा रहा है।
यह घटना अकेली नहीं है। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में डीजे शोर से जुड़ी ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ-साथ तनाव, उच्च रक्तचाप और यहां तक कि हृदय संबंधी बीमारियां भी बढ़ सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 55 डेसिबल से अधिक शोर को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, जबकि डीजे सिस्टम अक्सर 100 डेसिबल से ऊपर की ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

कोर्ट की सख्ती और सरकार का पक्ष
जनहित याचिका राज्य शासन की ओर से दायर की गई थी, जिसमें डीजे और साउंड बॉक्स के नियमन के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि वर्तमान कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 में अपराधियों पर केवल मामूली जुर्माना लगाने का प्रावधान है। “कोलाहल अधिनियम में इतने कड़े प्रावधान हैं ही नहीं। एक या दो बार 500-1000 रुपये पेनाल्टी लगाकर छोड़ दिया जाता है, ना सामान की जब्ती होती है और ना ही कोई कड़े नियम बनाए गए हैं,” यह कहते हुए शासन ने संशोधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
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