
Chhattishgarh120 गांवों में जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, विकास परियोजनाओं से किसानों की बढ़ी मुश्किलें
रायपुर। छत्तीसगढ़ के 120 गांवों में किसानों और जमीन मालिकों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने पांच प्रमुख विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की तैयारी शुरू की है। इसके चलते बीते दो महीने से इन गांवों की जमीनों की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है।

किन परियोजनाओं के कारण लगी रोक?
यह रोक मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में लगी है, जहां बड़ी बुनियादी और औद्योगिक परियोजनाओं का काम प्रस्तावित है। इनमें—
- 1. राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) विस्तार परियोजना
- 2. रेल कॉरिडोर परियोजना
- 3. नदी जोड़ो और सिंचाई परियोजना
- 4. औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना
- 5. विद्युत एवं खनन आधारित परियोजनाएं
इन परियोजनाओं के लिए व्यापक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता है। इसलिए रजिस्ट्री और बिक्री पर रोक लगाकर भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

किसानों की दिक्कतें
- जिन किसानों को आपातकालीन जरूरत है, वे अपनी जमीन बेचकर पैसे नहीं जुटा पा रहे हैं।
- कई परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई, शादी और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए जमीन बेचने का मन बनाया था, लेकिन अब वे अटके हुए हैं।
- रजिस्ट्री पर रोक लगने से जमीन का बाजार मूल्य भी प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों की संपत्ति का सही आकलन नहीं हो पा रहा।
किसानों की मांग
किसानों ने सरकार से अपील की है कि या तो उन्हें उचित मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था तुरंत दी जाए या फिर रजिस्ट्री पर लगी रोक को हटाया जाए।
किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन उनकी रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक स्थिति को ठप करना न्यायसंगत नहीं है।

प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह रोक अस्थायी है और केवल उन क्षेत्रों तक सीमित है, जहां परियोजनाओं का सर्वेक्षण और अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का दावा है कि प्रभावित किसानों को भूमि अधिग्रहण के समय नियमों के मुताबिक मुआवजा और पुनर्वास पैकेज मिलेगा।
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