
छत्तीसगढ़: सागौन के 230 पेड़ों की अवैध कटाई, MRS Minerals के संचालक पर आरोप
रायपुर, 26 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सागौन के 230 बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय खनन कंपनी एमआरएस मिनरल्स के संचालक पर मुख्य आरोपी होने का आरोप लगाया गया है। वन विभाग की शिकायत पर राजस्व विभाग ने प्राथमिक जांच शुरू की है, लेकिन विभाग की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं। पर्यावरणीय क्षति और आर्थिक हानि का अनुमान लाखों रुपये में लगाया जा रहा है।

घटना का विवरण: जंगलों पर कहर बनकर टूटी अवैध कटाई
घटना बालोद जिले के भिंदो क्षेत्र के दौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत हुई। यहां राजस्व भूमि पर स्थित सागौन के 230 पेड़ों को बिना किसी अनुमति के काट दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार, कटाई रात के अंधेरे में की गई, जिसमें भारी मशीनरी और ट्रक का इस्तेमाल किया गया। कटे हुए लट्ठों को खनन साइट पर ले जाया गया, जहां इन्हें अवैध रूप से प्रोसेस किया जा रहा था।
वन विभाग की गश्ती टीम ने 20 सितंबर को इसकी जानकारी हासिल की, जिसके बाद पंचनामा तैयार किया गया। सागौन की लकड़ी बाजार मूल्य के हिसाब से करोड़ों रुपये की बताई जा रही है। यह कटाई न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता को भी खतरे में डाल रही है।
आरोपी कौन? एमआरएस मिनरल्स के संचालक पर गंभीर आरोप
मुख्य आरोपी एमआरएस मिनरल्स के संचालक राकेश सिंह हैं, जो बालोद में आयरन ओर और अन्य खनिजों के अवैध खनन के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। वन विभाग की प्रारंभिक जांच में पता चला कि कंपनी ने खनन क्षेत्र विस्तार के बहाने पेड़ों की कटाई की साजिश रची। संचालक पर वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

स्थानीय निवासी ने बताया, “कंपनी के कर्मचारी दिन-रात जंगल में सक्रिय रहते थे। सागौन की लकड़ी को खनन सामग्री के साथ मिलाकर बाहर ले जाया जा रहा था।” पुलिस ने संचालक को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। कंपनी के अन्य अधिकारियों पर भी संलिप्तता के आरोप हैं।
राजस्व विभाग की भूमिका: लापरवाही या मिलीभगत के शक?
सबसे बड़ा सवाल राजस्व विभाग की भूमिका पर उठ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी और तहसीलदार को कटाई की जानकारी थी, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभाग ने दावा किया है कि जांच चल रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर गश्त की कमी ने संदेह बढ़ा दिया है। वन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “राजस्व भूमि होने के कारण हमारी पहुंच सीमित थी, लेकिन अब संयुक्त टीम गठित की गई है।”
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