
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर नक्सली कैंप तबाह: नारायण डोंगर की गुफाओं में छिपे थे सुराग
नुआपाड़ा/गरियाबंद, 8 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित नुआपड़ा जिले के सिनापाली थाना क्षेत्र में नारायण डोंगर के सघन जंगलों और गुफाओं में छिपे एक नक्सली कैंप को सुरक्षा बलों ने मंगलवार को ध्वस्त कर दिया। यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ पुलिस और ओडिशा के विशेष ऑपरेशन समूह (SOG) के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा था, जिसमें डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और डिस्ट्रिक्ट वॉलंटरी फोर्स (DVF) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऑपरेशन का विवरण
सुरक्षा बलों को खुफिया जानकारी मिली थी कि नारायण डोंगर के संरक्षित जंगल क्षेत्र में नक्सलियों ने एक गुप्त ठिकाना बनाया है। इसके आधार पर मंगलवार सुबह एक व्यापक कांबिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। इस अभियान में लगभग 300 जवानों ने हिस्सा लिया, जिनमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सुरक्षा बल शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बलों ने कैंप को पूरी तरह तबाह कर दिया।
बरामद सामग्री
घटनास्थल से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद की, जिसमें शामिल हैं:
- टिफिन बम
- 20 जिलेटिन की छड़ें
- डेटोनेटर
- IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस)
इसके अलावा, नक्सलियों के दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य सामग्री भी जब्त की गई। यह बरामदगी नक्सलियों की इस क्षेत्र में सक्रियता का स्पष्ट संकेत देती है।
नक्सलियों की रणनीति पर चोट
नारायण डोंगर का जंगल क्षेत्र, जो छत्तीसगढ़ के गरियाबंद और ओडिशा के नुआपड़ा जिले की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना रहा है। घने जंगल और गुफाएं नक्सलियों को छिपने और अपनी गतिविधियों को अंजाम देने में मदद करती हैं। इस ऑपरेशन ने न केवल उनके ठिकाने को नष्ट किया, बल्कि उनकी रणनीति को भी गहरा झटका दिया है।
आधिकारिक बयान
छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने बताया, “यह ऑपरेशन इंटेलिजेंस आधारित था और हमारी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नक्सलियों को उनके सुरक्षित ठिकानों से बेदखल करना है।” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे ताकि क्षेत्र को नक्सलवाद से मुक्त किया जा सके।
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस सफलता पर सुरक्षा बलों को बधाई दी और कहा, “हमारी सरकार नक्सलवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। SOG और अन्य बलों की इस उपलब्धि से हमारा संकल्प और मजबूत हुआ है।”
भविष्य की रणनीति
केंद्र और राज्य सरकारों ने मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई है। ड्रोन कैमरों और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर नक्सलियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हाल के महीनों में बस्तर और आसपास के क्षेत्रों में कई नक्सली मुठभेड़ों में ढेर किए गए हैं, और कई ने सरेंडर भी किया है।
स्थानीय प्रभाव
यह ऑपरेशन न केवल नक्सलियों के लिए एक झटका है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी एक राहत की खबर है, जो नक्सली हिंसा से प्रभावित रहे हैं। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों और संचार सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई है ताकि नक्सलियों का प्रभाव कम किया जा सके और स्थानीय लोगों का जीवन स्तर सुधरे।
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