
Chhattisgarh:नाबालिग साबित हुआ 24 साल पुराने दुष्कर्म मामले का आरोपी, छत्तीसगढ़ HC ने सजा रद्द करते हुए सुनाया यह फैसला
बिलासपुर, 17 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक लंबे समय से चले आ रहे दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 24 साल पुराने एक मामले में आरोपी को नाबालिग साबित करने के बाद कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को रद्द कर दिया। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में आरोपी की उम्र के प्रमाणीकरण की अहमियत को रेखांकित करता है। जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया है।

घटना का पृष्ठभूमि: 2001 की पुरानी वारदात
मामला छत्तीसगढ़ के एक ग्रामीण इलाके से जुड़ा है, जहां 2001 में एक युवती ने अपने पड़ोसी पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता ने बताया था कि आरोपी ने उस समय जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित किए थे। ट्रायल कोर्ट ने 2010 में आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत दोषी ठहराते हुए सात वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने तुरंत ही हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन विभिन्न कारणों से सुनवाई में देरी होती रही। अब 24 वर्ष बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां नई जांच ने पूरी तस्वीर बदल दी।
आरोपी की उम्र पर विवाद: नाबालिग साबित होने का आधार
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि अपराध के समय आरोपी की उम्र मात्र 16 वर्ष थी, जिससे वह नाबालिग था। उन्होंने स्कूल रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज पेश किए, जो आरोपी की उम्र को साबित करते थे। अभियोजन पक्ष ने शुरुआत में इन दस्तावेजों पर सवाल उठाए, लेकिन कोर्ट ने स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। ऑसिफिकेशन टेस्ट (हड्डियों की जांच) और अन्य मेडिकल रिपोर्ट्स ने भी आरोपी की नाबालिग स्थिति की पुष्टि की। जस्टिस राजपूत ने अपने फैसले में कहा, “अपराध के समय आरोपी नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय अधिनियम के तहत ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही अमान्य हो जाती है। सजा को रद्द किया जाता है।”
कोर्ट का फैसला: सजा रद्द, आरोपी को राहत
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया और आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी नाबालिग था, तो मामला किशोर न्याय बोर्ड के दायरे में आता है, न कि सिविल कोर्ट के। इस फैसले से आरोपी को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है। हालांकि, पीड़िता पक्ष ने फैसले पर असंतोष जताया है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है।
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