
छत्तीसगढ़ में स्वच्छता के लिए इंदौर मॉडल: महापौरों ने साझा किए अनुभव
11 जुलाई 2025
इंदौर मॉडल को अपनाने की तैयारी
छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए अब इंदौर के स्वच्छता मॉडल को अपनाया जाएगा। नवा रायपुर के विश्राम भवन में 10 जुलाई को आयोजित एक कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने इसकी घोषणा की। इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौरों और आयुक्तों ने इंदौर भ्रमण के अनुभव साझा किए, जिससे छत्तीसगढ़ में स्वच्छता के क्षेत्र में नई रणनीतियां बनाई जा सकें।
इंदौर भ्रमण से मिली प्रेरणा
20 से 24 जून तक दो चरणों में छत्तीसगढ़ के महापौरों और अधिकारियों ने इंदौर का अध्ययन भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने इंदौर के कचरा प्रबंधन, स्वच्छता प्रणाली, नागरिक भागीदारी और आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन तकनीकों का अवलोकन किया। रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने बताया कि इंदौर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्त प्रतिबंध और कचरे के पृथक्करण की प्रक्रिया ने उन्हें प्रभावित किया।
जनभागीदारी और तकनीक का अनूठा संगम
इंदौर के स्वच्छता मॉडल की सबसे बड़ी ताकत नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और तकनीकी नवाचार हैं। महापौरों ने बताया कि इंदौर में घर-घर कचरा संग्रहण, जीपीएस-ट्रैक्ड वाहन, और 311 शिकायत निवारण एप जैसी प्रणालियों ने स्वच्छता को एक जनांदोलन बना दिया। रायपुर सहित अन्य शहरों में भी अब एनजीओ के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाने और कचरे को छह श्रेणियों में छांटने की योजना बनाई जा रही है।
रायपुर में लागू होंगे नए कदम
रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने कार्यशाला में बताया कि इंदौर से प्रेरणा लेकर रायपुर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा। इसके लिए 20 सदस्यीय टीम गठित की जाएगी, जो डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और सफाई वाहनों की निगरानी करेगी। साथ ही, एक विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो आउटसोर्सिंग एजेंसियों के कार्यों की समीक्षा करेगी।
स्वच्छ भारत मिशन को मिलेगा बल
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि इंदौर के अनुभवों से छत्तीसगढ़ में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत किए जा रहे नवाचारों को और मजबूती मिलेगी। कार्यशाला में भविष्य की योजनाओं और सामुदायिक सहभागिता पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने जोर दिया कि इंदौर की तरह छत्तीसगढ़ के शहरों को भी स्वच्छता के मामले में देश में अग्रणी बनाने के लिए ठोस रणनीतियां बनाई जाएंगी।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि छत्तीसगढ़ के शहरों में इंदौर मॉडल को लागू करने के लिए संसाधनों और प्रशिक्षण की जरूरत होगी। महापौरों ने सुझाव दिया कि स्थानीय स्तर पर स्वच्छता मित्रों और नागरिकों के साथ संवाद बढ़ाया जाए। इसके अलावा, कचरा ट्रांसफर स्टेशन, बायोगैस संयंत्र, और रीसायकल सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे को विकसित करने की योजना पर काम शुरू होगा।
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