
Chhattisgarh में वन भैंसों की संख्या में बढ़ोत्तरी, बारनवापारा बनी संरक्षण का नया केंद्र
रायपुर, 26 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्य के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगभग 30 वन भैंसों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंद्रावती का प्राकृतिक वातावरण वन भैंसों के लिए अत्यंत अनुकूल है और यह राष्ट्रीय स्तर पर भी एक अद्वितीय जैव-विविधता क्षेत्र साबित हो सकता है।

बारनवापारा अभ्यारण्य का सफल प्रयास
संरक्षण के क्षेत्र में सबसे उल्लेखनीय काम बारनवापारा अभ्यारण्य में हुआ है। असम के मानस टाइगर रिजर्व से नर-मादा वन भैंसों को विशेष 10 हेक्टेयर के बाड़े में लाकर रखा गया। यह प्रयोग 2020 में शुरू हुआ था और अब सफलता का रूप ले चुका है। तीन साल के भीतर वन भैंसों की संख्या 6 से बढ़कर 10 हो गई है। यह स्पष्ट करता है कि बारनवापारा का वातावरण इन दुर्लभ प्रजातियों के लिए अत्यंत उपयुक्त है।
सीतानदी में भी दर्ज हुई उपस्थिति
कभी दर्जनों की संख्या में रहने वाले उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में फिलहाल एक नर वन भैंसा दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यहां भी वन भैंसों की संख्या में बढ़ोत्तरी संभव है।
पर्यटन के लिए नया आकर्षण
सरकार इंद्रावती टाइगर रिजर्व को पर्यटन-अनुकूल बनाने की दिशा में काम कर रही है। जंगल सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक इन दुर्लभ वन्यजीवों, विशेषकर वन भैंसों को नजदीक से देख सकेंगे। यह उद्यान आने वाले समय में कान्हा और किसली जैसे पर्यटन स्थलों की तरह विकसित हो सकता है।

वन मंत्री केदार कश्यप का विश्वास
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि 2001 में वन भैंस को राजकीय पशु घोषित किया गया और उसके संरक्षण पर काम किए गए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बारनवापारा में किए गए प्रयास इस दिशा में मील का पत्थर साबित हुए हैं। मंत्री ने भरोसा जताया कि भविष्य में वन भैंसों की संख्या में और बढ़ोत्तरी होगी और यह प्रजाति प्रदेश के जंगलों में मजबूती से स्थापित होगी।
प्रदेश में वन भैंसों की कुल संख्या
- इंद्रावती टाइगर रिजर्व: 30
- बारनवापारा अभ्यारण्य: 10
- उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व: 1
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