
Chhattisgarh शराब घोटाला: प्रदेश का बहुचर्चित शराब घोटाला.. ED ने 30 अफसरों को किया पूछताछ के लिए तलब, PMLA 50 के तहत नोटिस जारी
छत्तीसगढ़ में शराब नीति से जुड़े बहुचर्चित घोटाले ने एक बार फिर राजनीतिक हलचल मचा दी है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में 30 से अधिक सरकारी अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत नोटिस जारी किए हैं, जिसके तहत इन अधिकारियों को जल्द ही ED के दफ्तर में हाजिर होने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले की जांच के तहत की गई है, जो 2019 से 2022 के बीच चला। ED का दावा है कि यह घोटाला पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पनपा, जिसमें अवैध शराब बिक्री और कमीशन के नाम पर भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघी गईं।

घोटाले की पृष्ठभूमि: अवैध शराब कारोबार का काला साम्राज्य
यह मामला छत्तीसगढ़ की शराब नीति पर आधारित है, जहां राज्य सरकार के आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार का एक विशाल नेटवर्क सामने आया। ED की जांच के अनुसार, 2019 से 2022 तक अवैध शराब की बिक्री कुल बिक्री का 30-40 प्रतिशत तक थी। एक आपराधिक सिंडिकेट ने हर बोतल शराब से अवैध कमीशन वसूला, जिससे राज्य के खजाने को 2,161 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सिंडिकेट के प्रमुख के रूप में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल तुतेजा और रायपुर मेयर ऐजाज धेबर के भाई अनवर धेबर का नाम प्रमुखता से उभरा। इनके नेतृत्व में डिस्टिलरी मालिक, होलोग्राम निर्माता, बोतल सप्लायर, ट्रांसपोर्टर और जिला आबकारी अधिकारी मिलकर यह कारोबार चला रहे थे। ED ने दावा किया कि डिस्टिलरी को राज्य विपणन कंपनी CSMCL से बाजार हिस्सेदारी मिलने पर ब्राइब दी जाती थी।
इस घोटाले की शुरुआत 2022 में इनकम टैक्स विभाग की शिकायत से हुई, जिसके आधार पर ED ने ECIR दर्ज किया। हालांकि, अप्रैल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पहली ECIR को रद्द कर दिया, क्योंकि आधारभूत अपराध PMLA की अनुसूची में नहीं था। इसके बाद ED ने नई FIR के आधार पर जांच तेज की, जिसमें छत्तीसगढ़ पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने 70 से अधिक नामजद आरोपी बनाए।

ED की कार्रवाई: 30 अधिकारियों पर शिकंजा, नोटिस जारी
सोमवार को ED ने 30 से अधिक वर्तमान और पूर्व आबकारी विभाग के अधिकारियों को PMLA की धारा 50 के तहत समन जारी किए। यह धारा जांच के दौरान बयान दर्ज कराने और सहयोग करने का प्रावधान करती है। सूत्रों के अनुसार, इनमें जिला कलेक्टर, आबकारी अधिकारी और अन्य वरिष्ठ अफसर शामिल हैं, जिन्होंने कथित रूप से सिंडिकेट को संरक्षण दिया। ED का कहना है कि ये अधिकारी अवैध बिक्री को बढ़ावा देने और कमीशन वितरण में सक्रिय थे। पूछताछ में इनसे शराब लाइसेंस वितरण,
नधिकृत बिक्री और धन के प्रवाह पर सवाल किए जाएंगे।
पिछले महीनों में ED ने कई गिरफ्तारियां की हैं। अप्रैल 2024 में अनिल तुतेजा को गिरफ्तार किया गया, जिसकी सुप्रीम कोर्ट ने आलोचना की और ‘हड़बड़ी’ वाली गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। सितंबर 2025 में रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास को ACB/EOW ने पकड़ा। जुलाई 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को ED ने गिरफ्तार किया, जब उनकी भिलाई स्थित रिहायशी जगह पर छापा मारा गया। इसके अलावा, ट्रांसपोर्टर अरविंद सिंह और शराब व्यापारी त्रिलोक सिंह धीillon जैसे प्रमुख आरोपी भी हिरासत में हैं। ED ने 14 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे, जहां से डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज बरामद हुए।
प्रमुख आरोपी और राजनीतिक कनेक्शन: सिंडिकेट के सूत्रधार कौन?
घोटाले के केंद्र में अनिल तुतेजा हैं, जिन्हें ED ने ‘किंगपिन’ बताया। तुतेजा के बेटे यश तुतेजा भी आरोपी हैं। अनवर धेबर, जो कांग्रेस नेता के भाई हैं, को UP STF ने गिरफ्तार किया। पूर्व विशेष सचिव आबकारी विभाग अरुण पति त्रिपाठी भी जेल में हैं। ED का आरोप है कि ये सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं से जुड़े थे, जिन्होंने पोस्टिंग और लाइसेंस वितरण को प्रभावित किया। पूर्व सीएम भूपेश बघेल पर भी ED ने छापे मारे, हालांकि वे खुद आरोपी नहीं हैं। कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया, जबकि BJP ने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार का ठीकरा फोड़ा।
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