
Chhattisgarh में NHM कर्मचारियों की हड़ताल आठवें दिन भी जारी, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के 16,000 से अधिक कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। आठवें दिन भी जारी इस आंदोलन ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को गहरे संकट में डाल दिया है। सरकारी अस्पतालों से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक मरीजों को इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

“संविदा गो” के नारे और बैलून से विरोध
बिलासपुर में एनएचएम कर्मचारियों ने “संविदा गो” के नारे लगाकर और बैलून उड़ाकर सरकार के प्रति अपना आक्रोश जताया। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित सेवा का दर्जा नहीं मिला। उनकी मांग है कि सरकार उनकी सेवाओं को स्थायी करे और उचित वेतनमान प्रदान करे।

2018 से अब तक सिर्फ आश्वासन
एनएचएम कर्मचारी संघ के कार्यकारी प्रांताध्यक्ष श्याम मोहन दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2018 में नियमितीकरण के प्रस्ताव पर सहमति जताई थी और 60 प्रतिशत अंशदान देने की बात कही थी। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा, “20 साल की सेवा के बाद भी हमें न स्थायित्व मिला, न ही उचित वेतन। सरकार से बार-बार वार्ता हुई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिले, समाधान नहीं।”
स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा असर
हड़ताल के कारण प्रदेश के ज्यादातर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं ठप हो गई हैं। मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई जगह टीकाकरण व राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े कार्य रुक गए हैं। कर्मचारी संघ का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल का काम भी प्रभावित हुआ है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुकी है।
मंत्री के बयान से नाराजगी
स्वास्थ्य मंत्री ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि संविदा कर्मियों के नियमितीकरण के लिए केंद्र को कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। इस बयान ने हड़ताली कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ा दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर भ्रम फैला रही है, जबकि केंद्र पहले ही नियमितीकरण पर सहमति दे चुका है।
आंदोलन और होगा उग्र
एनएचएम कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और उग्र होगा। संघ ने कहा कि इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
जनता पर पड़ रहा असर
हड़ताल के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मरीजों को इलाज में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग निजी अस्पतालों की ओर रुख करने को मजबूर हैं, जिससे गरीब मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। खासकर मातृत्व सेवाएं, बच्चों का टीकाकरण और जनस्वास्थ्य अभियान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में शामिल हैं:
नियमितीकरण
समान कार्य के लिए समान वेतन
सेवा सुरक्षा
पदोन्नति की सुविधा
संविदा व्यवस्था समाप्त करना
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