
Chhattisgarh में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोप, चार कलेक्टरों का तबादला हुआ, नाम अब भी सूची से नहीं हटाए गए
मतदाता सूची में गड़बड़ी के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, ने दावा किया है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया है, जिसके चलते कई फर्जी और दोहरे नाम अब भी सूची में मौजूद हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विशेष रूप से कुरुद विधानसभा क्षेत्र में ऐसी शिकायतों का जिक्र किया है, जहां रायपुर और अभनपुर के लोगों के नाम कथित तौर पर कुरुद की मतदाता सूची में शामिल हैं।

चार कलेक्टरों का तबादला, फिर भी समस्या बरकरार
कई साल पहले, मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने चार जिलों के कलेक्टरों का तबादला किया था। इनमें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की कलेक्टर प्रियंका महोबिया भी शामिल थीं, जिन्हें हाल ही में पंचायत विभाग का निदेशक बनाया गया है। हालांकि, तबादलों के बावजूद, विपक्ष का आरोप है कि फर्जी और दोहरे नामों को हटाने की प्रक्रिया में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। कांग्रेस नेता दीपक बैज ने निर्वाचन आयोग से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची में डुप्लिकेट प्रविष्टियों, फर्जी पते और एक ही पते पर कई मतदाताओं के पंजीकरण जैसे मुद्दों को उठाया है।
बीजेपी का पलटवार और पुनरीक्षण की मांग
इन आरोपों पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कुरुद से विधायक अजय चंद्राकर ने भूपेश बघेल के दावों का जवाब देते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची में गड़बड़ी है, तो बिहार की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी गहन पुनरीक्षण की जरूरत है। बीजेपी सांसद सुनील सोनी ने भी जिला निर्वाचन आयोग पर लापरवाही का आरोप लगाया और मतदाता सूची में नाम जोड़ने और गलत नाम हटाने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मांगा। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है।
निर्वाचन आयोग पर सवाल और जनता का भरोसा
कांग्रेस ने दावा किया है कि निर्वाचन आयोग इस मामले में जवाब देने में विफल रहा है। राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची में गड़बड़ियों के सबूत पेश किए थे, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची में अनियमितताओं की शिकायतें न केवल विधानसभा चुनावों में, बल्कि हाल के पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में भी सामने आई हैं। निर्वाचन आयोग से मांग की जा रही है कि वह मतदाता सूची को मशीन-पठनीय प्रारूप में उपलब्ध कराए और मतदान केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक करे ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
आगे की राह और सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारों की आवश्यकता है। डिजिटल पारदर्शिता, तीसरे पक्ष द्वारा ऑडिट और सख्त कानूनी प्रावधानों जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। छत्तीसगढ़ की मुख्य निर्वाचन अधिकारी रीना बाबासाहेब कंगाले ने हाल ही में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) की घोषणा की थी, जो 2 अगस्त से शुरू हो चुका है। जनता से इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है ताकि मतदाता सूची को और सटीक बनाया जा सके।
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