
Chhattisgarh में फसल बीमा घोटाला: केले की खेती को चना बताकर लाखों का फर्जीवाड़ा
25 सितंबर 2025,
रायपुर। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। यहां केले की फसल को चना (चना) फसल के रूप में दर्ज कर लाखों रुपये का फर्जी दावा भुगतान कर दिया गया। यह मामला छुरिया ब्लॉक के आमगांव ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां पूर्व कांग्रेस विधायक छन्नी साहू की शिकायत पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की है। आरोप है कि बीमा कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुआवजा अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ।

घोटाले का विवरण
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान पर मुआवजा प्रदान करना है, लेकिन यहां इसका दुरुपयोग किया गया। जांच में पाया गया कि आमगांव में कई किसानों की केले की फसल को चना फसल के रूप में बीमा कराया गया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाखों रुपये का क्लेम पास कर दिया गया, जो विभिन्न खातों में जमा हो गया। पूर्व विधायक छन्नी साहू ने जिला प्रशासन से शिकायत की, जिसके बाद जांच टीम गठित की गई। टीम ने मौके पर जाकर फसल की जांच की और फर्जीवाड़ा की पुष्टि की।
अधिकारियों का कहना है कि यह घोटाला स्थानीय स्तर पर बीमा एजेंटों, किसानों और अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ। केले की फसल, जो सब्जी श्रेणी में आती है, को अनाज फसल (चना) दिखाकर क्लेम लिया गया। इससे न केवल योजना की मंशा पर पानी फेरा गया, बल्कि असली किसानों को लाभ से वंचित किया गया। अनुमान है कि इस एक गांव में ही लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ, और पूरे जिले में जांच बढ़ाने पर करोड़ों का घोटाला उजागर हो सकता है।
जांच और कार्रवाई
पूर्व विधायक छन्नी साहू की शिकायत पर जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। जांच टीम में कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हैं। टीम ने गांव में सर्वे किया और पाया कि कई खेतों में केले की फसल थी, लेकिन दस्तावेजों में चना दर्ज था। आरोपी किसानों और एजेंटों से पूछताछ की जा रही है। जिला कलेक्टर ने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, और फर्जी क्लेम की रकम वसूली जाएगी।

यह घोटाला छत्तीसगढ़ में पहले भी सामने आए अनियमितताओं की कड़ी है। जुलाई 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के दौरान 636 करोड़ रुपये का नुकसान होने की जांच शुरू हुई थी। इसी तरह, बिलासपुर में भी बीमा कंपनी को 48 लाख मिले, लेकिन शासन के 2 करोड़ जमा नहीं किए गए। खैरागढ़ जिले में भी फसल बीमा घोटाले की शिकायतें हैं।
प्रभाव और प्रतिक्रिया
यह घोटाला किसानों की योजना पर विश्वास को कमजोर कर रहा है। कई किसान कहते हैं कि फर्जी क्लेम से असली नुकसान वाले किसानों को लाभ नहीं मिलता। पूर्व विधायक साहू ने कहा कि यह गरीब किसानों के साथ धोखा है, और पूरे राज्य में जांच होनी चाहिए। विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को उठाकर सरकार पर दबाव बना रही हैं।
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