
Chhattisgarh हाउसिंग बोर्ड में भ्रष्टाचार का काला अध्याय: तालपुरी घोटाले की जांच फाइल चोरी
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रायपुर (जसेरि)। छत्तीसगढ़ के गृह निर्माण मंडल (हाउसिंग बोर्ड) में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों ने एक नया मोड़ ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में कथित रूप से भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने के कारण अब पूरे विभाग पर चोरों का कब्जा हो गया लगता है। तालपुरी घोटाले से जुड़ी महत्वपूर्ण जांच फाइल के चोरी हो जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया है। वर्तमान सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है, लेकिन विभागीय स्तर पर चल रही साजिशें जांच को पटरी से उतारने का प्रयास कर रही हैं।

भूपेश बघेल सरकार में मनमाने प्रमोशन और रिश्वतखोरी का खेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के शासनकाल में हाउसिंग बोर्ड के कई वरिष्ठ अधिकारी भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे नजर आए। मैनेजिंग डायरेक्टर एमडी पनरिया और हर्ष कुमार जोशी जैसे अधिकारियों पर मनमाने प्रमोशन देने का आरोप लगा। इन प्रमोशनों के पीछे कथित रूप से भूपेश बघेल से रिश्तेदारी और पैसे का लेन-देन प्रमुख भूमिका निभा रहा था। इसी का नतीजा है कि आज हाउसिंग बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण विभाग पर भ्रष्ट तत्वों का वर्चस्व कायम है। तालपुरी आवासीय परियोजना में 1,000 करोड़ से अधिक का घोटाला सामने आया, जिसमें जमीन अधिग्रहण से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर अनियमितताएं हुईं। पूर्व संपत्ति अधिकारी द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में इन घोटालों का खुलासा था, लेकिन अब वह फाइल गायब है।
तालपुरी घोटाले की जांच फाइल चोरी: साजिश की बू
तालपुरी घोटाले की जांच 1 फरवरी 2020 को लोकायुक्त में दर्ज हुई थी। पांच वर्षों में चली सुनवाई के दौरान साक्ष्य संग्रहित किए गए थे। 3 जून 2025 को नया रायपुर के मुख्य संपत्ति अधिकारी ने पत्र (संदर्भ संख्या 1166/F44/Estate) जारी कर फाइल के गुम होने की सूचना दी और एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया। लेकिन राखी थाना प्रभारी ने 2 जून 2025 को पत्र (संदर्भ संख्या 57/2025) में इसे गैर-हस्तक्षेप योग्य बताते हुए अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी। हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त अवनिश शरण ने फाइल मंगाने का आदेश दिया था, लेकिन उपलब्ध न होने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चोरी जानबूझकर की गई है ताकि भ्रष्ट अधिकारियों को बचाया जा सके। लोकायुक्त कोर्ट की आखिरी सुनवाई 7 मई 2025 को हुई, जहां आयुक्त को समन जारी किया गया लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अगली सुनवाई 27 जून 2025 को निर्धारित है।
भ्रष्टाचार के पुराने जख्म: 20-25 सालों का काला इतिहास
हाउसिंग बोर्ड में भ्रष्टाचार का इतिहास 20-25 वर्ष पुराना है। अभिलाषा कॉम्प्लेक्स और हिमालयन हाइट्स जैसे प्रोजेक्ट्स में 1,500-2,000 करोड़ का नुकसान हुआ। अधिकारियों ने सरकारी प्रोजेक्ट से पहले निजी लाभ के लिए जमीन हथिया ली, बेनामी संपत्तियां बनाईं और बिल्डरों से साठगांठ की। ठेकेदारों से 30-35 प्रतिशत कमीशन वसूलने के कारण निर्माण गुणवत्ता खराब रही, जिससे फ्लैट जर्जर हो गए। टेंडर प्रक्रिया में काली सूचीबद्ध ठेकेदारों को अनुबंध दिए गए, अतिरिक्त निर्माण हुए और अवैध कब्जे कराए गए। RTI के माध्यम से सबूत जमा किए गए, लेकिन भूपेश बघेल सरकार में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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