
Chhattisgarh हाईकोर्ट का बड़ा कदम: बाल तस्करी केस में छह महीने की समयसीमा
9 अक्टूबर 2025,
छत्तीसगढ़ में बाल तस्करी की घटनाओं ने समाज को गहरी चिंता में डाल रखा है। इन नाजुक मामलों में न्याय प्रक्रिया की धीमी गति न केवल पीड़ित बच्चों के भविष्य को खतरे में डालती है, बल्कि अपराधियों को भी प्रोत्साहन देती है। इसी समस्या से निपटने के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और कठोर दिशानिर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है, जिसमें सभी लंबित बाल तस्करी मामलों के ट्रायल को छह महीने के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा करने का आदेश दिया गया है। यह निर्देश न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज करेगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने में भी मील का पत्थर साबित होगा।

हाईकोर्ट का सख्त सर्कुलर: छह महीने की समयबद्धता
बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों को एक विस्तृत सर्कुलर जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, सर्कुलर जारी होने की तारीख से बाल तस्करी से जुड़े सभी मुकदमों का ट्रायल छह महीने के अंदर पूरा किया जाना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा है कि यदि आवश्यक हो, तो इन मामलों की रोजाना सुनवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि निर्धारित समयसीमा का पालन हो सके।

यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले पर आधारित है, जिसमें बाल तस्करी जैसे संवेदनशील अपराधों में त्वरित न्याय की आवश्यकता पर बल दिया गया था। हाईकोर्ट ने लापरवाही बरतने वाले न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी जारी की है। न्यायमूर्ति की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “ये मामले बच्चों के भविष्य से जुड़े हैं। किसी भी प्रकार की देरी या उदासीनता स्वीकार्य नहीं होगी।” इस सर्कुलर से प्रदेश के निचले न्यायालयों पर न्याय वितरण की जिम्मेदारी और गंभीर हो गई है।
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