
छत्तीसगढ़ High Court सख्त: खराब सड़कों पर देरी से नाराज, बार-बार शपथ पत्रों से उद्देश्य पूरा नहीं होगा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2025 (मंगलवार) को प्रदेश भर की खस्ताहाल सड़कों के निर्माण और मरम्मत में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने शासन और अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सड़क निर्माण में टेक्निकल जांच, टेंडर और वर्क ऑर्डर जैसे चरणों में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जो स्वीकार्य नहीं।

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि व्यवस्था में सुधार हो और ठोस कदम उठाए जाएं, क्योंकि बार-बार शपथ पत्र दाखिल करने से उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा। यह मामला स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लिया गया था, जो प्रदेश की सड़कों की बदहाली पर जनहित याचिका (पीआईएल) का रूप ले चुका है।
सुनवाई के प्रमुख बिंदु
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद) ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की। शासन ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया, जिसमें कुछ सड़कों की प्रगति बताई गई:
रतनपुर-सेंदरी रोड: काम लगभग पूरा हो चुका है।
रायपुर रोड: 70% निर्माण पूर्ण, अगले 15 दिनों में समाप्ति की उम्मीद।
एनएचएआई की रिपोर्ट: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने सड़कों के शीघ्र पूर्ण होने का आश्वासन दिया।
कोर्ट ने तुर्काडीह, सेंदरी, रानीगांव, मलनाडीह और बेलतरा में पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बन रहे फुट ओवरब्रिज पर भी नजर रखी। एनएचएआई ने बताया कि अनुमानित लागत पहले 17.95 करोड़ थी, जो अब घटकर 11.38 करोड़ हो गई है। संयुक्त जांच पूरी हो चुकी है, और टेंडर प्रक्रिया के बाद निर्माण शुरू होगा।
हालांकि, कोर्ट ने बिलासपुर के पेंड्रीडीह बाईपास से नेहरू चौक तक की सड़क पर नाराजगी जताई, जो अप्रैल 2025 में स्वीकृत होने के बावजूद अब तक प्रगति शून्य है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणियां
बिलासपुर-रायपुर एनएच-30 (पूर्व में एनएच-90): इस नेशनल हाईवे की बदहाली पर कोर्ट ने एनएचएआई की चुप्पी पर सवाल उठाए। कहा गया, “स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम न उठाना और मौन रहना चिंताजनक है।”
शपथ पत्रों पर फटकार: कोर्ट ने कहा कि बार-बार हलफनामे दाखिल करने से कुछ नहीं बदल रहा। रतनपुर-केंदा मार्ग की बदहाली पर पीडब्ल्यूडी सेक्रेटरी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।रायपुर-बिलासपुर मुख्य सड़क: पावर प्लांटों की राख फैलने की समस्या पर मुख्य सचिव से जवाब मांगा। कोर्ट ने इसे पर्यावरण और सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
कोर्ट ने सामान्य टिप्पणी की, “एक समाज जो अपनी सड़कों को नजरअंदाज करता है, वह अपनी प्रगति को नजरअंदाज करता है।” यह बयान सड़कों को सार्वजनिक कल्याण और विकास का आधार मानते हुए दिया गया।
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