
Chhattisgarh हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने बस्तर पेड़ कटाई घोटाले में आरोपियों को किया बरी
बिलासपुर, 10 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 36 साल पुराने बस्तर पेड़ कटाई घोटाले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सीबीआई कोर्ट के निर्णय को पलट दिया और दोनों आरोपियों, वीरेंद्र नेताम और अन्य, को बरी कर दिया। यह मामला 1989 में कोंडागांव वन क्षेत्र में पेड़ों की अवैध कटाई से संबंधित था, जिसमें कलेक्टर कोर्ट के आदेश में हेराफेरी कर 150 की बजाय 250 पेड़ों की कटाई की अनुमति दिखाने का आरोप था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल शक या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

घोटाले का विवरण: क्या था मामला?
1989 में कोंडागांव वन क्षेत्र में हुए इस घोटाले में आरोप था कि तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में 150 पेड़ों की कटाई की अनुमति को बदलकर 250 पेड़ दिखाए गए। अभियोजन पक्ष के अनुसार, रीडर परशुराम देवांगन ने कलेक्टर के आदेश में हेराफेरी की और संख्या को 150 से 250 कर दिया। इसके बाद, वीरेंद्र नेताम और अन्य ने 250 पेड़ काटकर लगभग 9 लाख 97 हजार रुपये की लकड़ी बेच दी। इस मामले में सीबीआई ने 1998 में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।
रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने 2010 में दोनों आरोपियों को आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई थी। साथ ही, जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि, आरोपियों ने इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस रजनी दुबे की अध्यक्षता वाली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने दोनों आरोपियों की अपील पर सुनवाई की। कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान दिया:
साक्ष्यों की कमी: हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा। कोर्ट ने कहा कि केवल शक या अनुमान के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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