
छत्तीसगढ़ High Court में उच्च न्यायिक सेवा के पदाधिकारियों का तबादला और नई नियुक्तियां
रायपुर, 8 अक्टूबर 2025: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में प्रशासनिक दक्षता को बढ़ावा देने और न्यायिक प्रक्रियाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उच्च न्यायिक सेवा से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों का तबादला और नई नियुक्तियां की गई हैं। यह कदम न्यायालय की स्थापना को मजबूत करने, सतर्कता विभाग को सशक्त बनाने और सूचना के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, जो बिलासपुर में स्थित है और 1 नवंबर 2000 को स्थापित हुआ था, राज्य की न्यायिक व्यवस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां के पदाधिकारी न्यायालय के दैनिक संचालन, प्रशासनिक कार्यों और कानूनी प्रक्रियाओं की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हाल ही में जारी आधिकारिक आदेश में तीन प्रमुख अधिकारियों के पदों में बदलाव किया गया है, जो न्यायालय की सतर्कता, प्रशासन और सूचना प्रबंधन को सीधे प्रभावित करेंगे। यह बदलाव राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा दे सकता है।

उच्च न्यायालय की पृष्ठभूमि और महत्व
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की स्थापना मध्य प्रदेश से अलग होकर नए राज्य के गठन के बाद हुई थी। यह न्यायालय राज्य के सभी जिलों में न्यायिक मामलों की सुनवाई, अपीलों का निपटारा और संवैधानिक मुद्दों पर फैसले सुनाने का कार्य करता है। वर्तमान में, न्यायालय में लगभग 20 से अधिक न्यायाधीश कार्यरत हैं, और इसका प्रशासनिक ढांचा महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) के नेतृत्व में संचालित होता है। सतर्कता विभाग और सूचना प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, खासकर डिजिटल युग में जहां ई-कोर्ट सिस्टम और ऑनलाइन फाइलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन बदलावों से न्यायालय की कार्यक्षमता में 20-30% की वृद्धि की उम्मीद की जा रही है, जैसा कि उच्च न्यायालय के अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिया है।
प्रमुख तबादले और नियुक्तियां
आधिकारिक आदेश के अनुसार, उच्च न्यायिक सेवा के सदस्यों में निम्नलिखित बदलाव किए गए हैं:
रजनीश श्रीवास्तव की नई भूमिका
उच्च न्यायिक सेवा के सदस्य और वर्तमान में विधि एवं विधायी कार्य विभाग के प्रमुख सचिव रजनीश श्रीवास्तव को कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से उच्च न्यायालय की स्थापना में महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल) के पद पर स्थानांतरित किया गया है। श्रीवास्तव, जो पिछले 15 वर्षों से विधि विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं, ने कई महत्वपूर्ण कानूनी सुधारों में योगदान दिया है। महापंजीयक का पद न्यायालय के समग्र प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व करता है, जिसमें मुकदमों का प्रबंधन, स्टाफ की देखरेख, बजट आवंटन और न्यायिक प्रक्रियाओं का सुचारू संचालन शामिल होता है।

मनीष कुमार ठाकुर का सतर्कता विभाग में तबादला
इसी क्रम में, उच्च न्यायिक सेवा के सदस्य और वर्तमान में उच्च न्यायालय की स्थापना में महापंजीयक के पद पर पदस्थ मनीष कुमार ठाकुर को अब कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से उच्च न्यायालय की स्थापना में महापंजीयक (सतर्कता) के पद पर नियुक्त किया गया है। ठाकुर, जो 2005 से न्यायिक सेवा में हैं, ने पहले कई जिलों में जिला न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है और भ्रष्टाचार निरोधक मामलों में विशेषज्ञता रखते हैं। सतर्कता विभाग न्यायालय में अनुशासन बनाए रखने, शिकायतों की जांच करने और भ्रष्टाचार निरोधक उपायों का प्रबंधन करता है। उनकी यह नई भूमिका न्यायालय की आंतरिक सतर्कता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण होगी, खासकर ऐसे समय में जब न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया जा रहा है। ठाकुर ने हाल ही में एक सेमिनार में कहा था कि “सतर्कता न्यायपालिका की आत्मा है,” जो उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अन्य नियुक्तियां और बदलाव
आदेश में एक और महत्वपूर्ण बदलाव शामिल है, जिसमें उच्च न्यायिक सेवा के सदस्य और वर्तमान में उच्च न्यायालय की स्थापना में महापंजीयक (सतर्कता) के पद पर पदस्थ संजय कुमार जैन को अब कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से उच्च न्यायालय की स्थापना में महापंजीयक (सूचना प्रौद्योगिकी एवं सूचना का अधिकार) के पद पर नियुक्त किया गया है। जैन, जो आईटी बैकग्राउंड से हैं, ने ई-कोर्ट प्रोजेक्ट में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह पद सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से न्यायिक प्रक्रियाओं को डिजिटाइज करने और आरटीआई (सूचना का अधिकार) से संबंधित मामलों का प्रबंधन करता है। इस बदलाव से न्यायालय में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को गति मिलेगी, जैसे कि ऑनलाइन केस फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग्स।
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