
Chhattisgarh हाईकोर्ट का सड़क हादसों पर सख्त रुख: सरकार को फटकार, सुधार के लिए कड़े निर्देश
बिलासपुर, 11 अक्टूबर 2025 – छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों की भयावह स्थिति को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोरबा जिले में जुलाई माह में ही 200 से अधिक लोगों की मौत होने की खबरों पर अदालत ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति ए.के. प्रसाद की बेंच ने राज्य सरकार, उद्योग विभाग, पीडब्ल्यूडी, एनएचएआई और अन्य संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इन विभागों से शपथ-पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब मांगा है, जिसमें हादसों के कारणों, रोकथाम के उपायों और समयबद्ध कार्रवाई की योजना शामिल हो। यह मामला जनहित याचिका (पीआईएल) के रूप में दर्ज किया गया है, और अदालत ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा को राज्य की प्राथमिकता बनाना होगा।

कोरबा में सड़क हादसों का बढ़ता खतरा: भारी वाहनों और खराब सड़कों की मार
छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला कोयला खनन और राख परिवहन का प्रमुख केंद्र है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-130 पर रोजाना सैकड़ों ट्रक और हाइवा दौड़ते हैं। जुलाई 2025 में यहां दर्ज 200 से अधिक मौतें सड़क हादसों की भयानक तस्वीर पेश करती हैं। राज्य पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में छत्तीसगढ़ में कुल 6,752 सड़क हादसों में 6,166 लोगों की मौत हुई थी, जो 2023 की तुलना में 9% अधिक है। 2025 के प्रारंभिक आंकड़ों (जनवरी-फरवरी) में कोरबा जिले में ही 146 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 124 घायल हुए। जुलाई माह में यह संख्या चरम पर पहुंच गई, जब भारी वर्षा के कारण सड़कें फिसलन भरी हो गईं और कोयला परिवहन बढ़ने से ट्रक कतारें आम हो गईं।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारी वाहनों पर नियंत्रण की कमी, ओवरलोडिंग और ड्राइवरों की लापरवाही आम जनता की जान का दुश्मन बन चुकी है। एनएच-130 पर तीन किलोमीटर लंबी ट्रक कतारें और सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहन हादसों को न्योता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरबा की सड़कें कोयला उद्योग की तेजी से वृद्धि के कारण बोझ तले दबी हुई हैं, जहां प्रतिदिन 500 से अधिक ट्रक राख और कोयला ढोते हैं।
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