
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सब-इंजीनियर पदों से इंजीनियरिंग स्नातकों को बाहर रखना ‘मनमाना और भेदभावपूर्ण’
5 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सब-इंजीनियर पदों के लिए इंजीनियरिंग स्नातकों (बीई/बीटेक डिग्री धारकों) को अयोग्य ठहराने के नियम को ‘मनमाना और भेदभावपूर्ण’ करार दिया है। कोर्ट ने इस नियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह निर्णय योग्यता और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह फैसला इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से इस भेदभावपूर्ण नीति का विरोध कर रहे थे।
मामले का विवरण
छत्तीसगढ़ सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और अन्य विभागों में सब-इंजीनियर के पदों पर भर्ती के लिए नियम बनाए गए थे, जिसमें केवल डिप्लोमा धारकों को ही योग्य माना गया था, जबकि इंजीनियरिंग स्नातकों को इन पदों के लिए आवेदन करने से वंचित कर दिया गया था। इस नियम के खिलाफ कई इंजीनियरिंग स्नातकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने इस नीति को असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण बताया।
हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र साहू शामिल थे, ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा, “इंजीनियरिंग स्नातकों को सब-इंजीनियर पदों के लिए अयोग्य ठहराना न केवल मनमाना है, बल्कि यह समानता के अधिकार का भी उल्लंघन करता है। बीई/बीटेक डिग्री धारक डिप्लोमा धारकों की तुलना में उच्चतर योग्यता रखते हैं, और उन्हें इन पदों से बाहर रखना तर्कसंगत नहीं है।” कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि भर्ती नियमों में संशोधन कर इंजीनियरिंग स्नातकों को भी इन पदों के लिए आवेदन करने का अवसर प्रदान किया जाए।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इंजीनियरिंग स्नातकों के पास डिप्लोमा धारकों से अधिक तकनीकी ज्ञान और विशेषज्ञता होती है, फिर भी उन्हें इन पदों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की समस्या को और गंभीर बनाने वाला कदम बताया। याचिकाकर्ता रवि वर्मा ने कहा, “यह फैसला हमारे जैसे हजारों इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए न्याय की जीत है। हमारी योग्यता को नजरअंदाज करना अन्याय था, और अब हमें समान अवसर मिलेगा।”
सरकार की प्रतिक्रिया
छत्तीसगढ़ सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया जा रहा है, और जल्द ही इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी। सरकार भर्ती नियमों में संशोधन करने और कोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रभाव और महत्व
यह फैसला न केवल इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह भविष्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समानता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से छत्तीसगढ़ में बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे इंजीनियरिंग स्नातकों को नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे।
आगे की राह
हाईकोर्ट ने सरकार को तीन महीने के भीतर भर्ती नियमों में संशोधन करने और नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों को अब सब-इंजीनियर पदों के लिए आवेदन करने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी वर्षों की मेहनत और योग्यता को उचित मान्यता मिलने की उम्मीद है।
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