
Chhattisgarh High Court का बड़ा फैसला: पत्नी द्वारा शारीरिक संबंध बनाने से रोकना मानसिक क्रूरता, पति को मिला तलाक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि पत्नी द्वारा पति को शारीरिक संबंध बनाने से रोकना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए पति की अपील पर तलाक मंजूर कर लिया है।
11 साल से अलग रह रहे थे पति-पत्नी
डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा कि पति-पत्नी के बीच 11 वर्षों से चला आ रहा अलगाव दांपत्य संबंधों में गंभीर दूरी को दर्शाता है। कोर्ट ने माना कि पत्नी की लगातार शारीरिक संबंध बनाने की अनिच्छा पति के लिए मानसिक उत्पीड़न की स्थिति बनाती है।

फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द, हाईकोर्ट ने दिया तलाक
पहले फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए कहा कि लंबे समय तक संबंधों का न होना दांपत्य जीवन की बुनियाद को प्रभावित करता है। इसलिए पति की अपील मानते हुए तलाक प्रदान किया गया।
पत्नी को देना होगा 20 लाख रुपए गुजारा भत्ता
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति तलाक मिलने के बाद दो महीने के भीतर पत्नी को 20 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में देगा। यह राशि पत्नी की भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय की गई है।
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