
Chhattisgarh: Gariyaband में नक्सली मुठभेड़ में 10 नक्सलियों का सफाया, इनामी कमांडर मोडेम बालकृष्ण सहित बड़ी सफलता
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सुरक्षा बलों को गुरुवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए, जिनमें एक करोड़ के इनामी कमांडर मोडेम बालकृष्ण उर्फ मनोज भी शामिल है। यह मुठभेड़ मैनपुर थाना क्षेत्र के जंगलों में सुबह शुरू हुई और रुक-रुक कर फायरिंग जारी रही। पुलिस के अनुसार, यह ऑपरेशन नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सघन अभियान का हिस्सा है, जो केंद्र सरकार के 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मारे गए नक्सलियों पर कुल 3 करोड़ से अधिक का इनाम था।

मुठभेड़ का पूरा विवरण: जंगल में घेराबंदी और भीषण गोलीबारी
मैनपुर थाना क्षेत्र के घने जंगलों में विशेष टास्क फोर्स (STF), कोबरा कमांडो, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस की संयुक्त टीम नक्सली गतिविधियों की खुफिया जानकारी पर ऑपरेशन चला रही थी। सुबह करीब 6 बजे नक्सलियों की टुकड़ी को घेर लिया गया। नक्सलियों ने भारी गोलीबारी की, लेकिन सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में 10 नक्सलियों को मार गिराया।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मुठभेड़ स्थल से एके-47, एसएलआर समेत कई हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए। आईजी रायपुर रेंज अमरेश मिश्रा ने बताया, “रुक-रुक कर फायरिंग जारी है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। मारे गए नक्सलियों में मोडेम बालकृष्ण प्रमुख था, जो धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन का कमांडर था।” दो जवान मामूली रूप से घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।
मारे गए नक्सली: इनामी कमांडर की पहचान और इतिहास
मारे गए नक्सलियों में सबसे बड़ा नाम मोडेम बालकृष्ण उर्फ मनोज का है, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम था। वह नक्सली संगठन की पूर्वी बस्तर डिवीजन का प्रमुख कमांडर था और कई हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। अन्य मारे गए नक्सलियों में जयराम उर्फ गुड्डू (50 लाख इनामी) और सत्यम गावड़े (65 लाख इनामी) शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, ये नक्सली छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय थे और स्थानीय आदिवासियों पर अत्याचार करते थे। पिछले एक साल में इनके नेतृत्व में 5 से अधिक हमले हुए, जिनमें 3 जवान शहीद हुए थे। आईजी मिश्रा ने कहा, “ये नक्सली माओवादी विचारधारा के कट्टर समर्थक थे, लेकिन अब उनका सफाया हो गया है।” शवों की शिनाख्त पूरी हो चुकी है, और पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई: संयुक्त ऑपरेशन और रणनीति
यह ऑपरेशन छत्तीसगढ़ पुलिस की ई-30 यूनिट, सीआरपीएफ की 207 बटालियन, कोबरा कमांडो और ओडिशा की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। खुफिया एजेंसियों की टिपऑफ पर शुरू हुआ यह अभियान नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त करने का हिस्सा है। जिले के एसपी निखिल राखेजा ने बताया, “जंगल में आईईडी और जाल बिछाए गए थे, लेकिन हमारी टीम ने इन्हें निष्क्रिय कर दिया।”
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