
चेहरा बदलने से नहीं मिल रहा पोषण आहार, महिलाओं को हो रही परेशानी
पोषण आहार योजना में बदलाव की चुनौतियाँ
मध्य प्रदेश में पोषण आहार योजना के तहत महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन हाल ही में योजना के संचालन में किए गए बदलावों ने कई समस्याएँ खड़ी कर दी हैं। नई व्यवस्था में चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकग्निशन सिस्टम) लागू की गई है, जिसके कारण कई लाभार्थियों को पोषण आहार प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। तकनीकी खामियों और जागरूकता की कमी के चलते यह योजना अपने उद्देश्य में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही।
तकनीकी समस्याएँ बनीं बाधा
फेस रिकग्निशन सिस्टम को लागू करने का उद्देश्य पारदर्शिता लाना और गलत व्यक्तियों को लाभ लेने से रोकना था, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी और पुराने उपकरणों की वजह से यह सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा। कई महिलाओं ने शिकायत की है कि उनके चेहरे की पहचान बार-बार असफल हो रही है, जिसके कारण उन्हें राशन या पोषण आहार नहीं मिल पा रहा। खासकर बुजुर्ग महिलाओं और गर्भवती महिलाओं को इस नई प्रणाली को समझने और अपनाने में दिक्कत हो रही है।
बार-बार की परेशानी से त्रस्त लाभार्थी
पोषण आहार केंद्रों पर लंबी कतारें और बार-बार सिस्टम में गड़बड़ी के कारण महिलाओं को कई बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई महिलाएँ दूर-दराज के गाँवों से केंद्र तक पहुँचती हैं, लेकिन तकनीकी खराबी या गलत पहचान के कारण उन्हें निराशा का सामना करना पड़ता है। इससे न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि उनके परिवारों को भी पौष्टिक भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
जागरूकता और प्रशिक्षण की कमी
स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों और लाभार्थियों को नई प्रणाली के बारे में पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें इस सिस्टम को संचालित करने में दिक्कत हो रही है, और लाभार्थियों को भी इसे समझने में समय लग रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है।
सरकार से माँग, समस्याओं का त्वरित समाधान
महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से माँग की है कि इस योजना में तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द दूर किया जाए। साथ ही, वैकल्पिक व्यवस्था जैसे आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के आधार पर पोषण आहार वितरण की सुविधा दी जाए, ताकि तकनीकी समस्याओं का सामना करने वाली महिलाओं को राहत मिल सके। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक का उपयोग सही दिशा में हो तो यह योजना अधिक प्रभावी हो सकती है, लेकिन इसके लिए जमीनी स्तर पर बेहतर तैयारी और जागरूकता जरूरी है।
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