
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 22 आबकारी अधिकारी निलंबित, 3200 करोड़ तक पहुंची घोटाले की रकम
रायपुर में शराब घोटाले पर बड़ी कार्रवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले में शामिल 22 आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस घोटाले की रकम 2100 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच में सामने आया कि कारोबारी अनवर ढेबर ने इस घोटाले में 90 करोड़ रुपये से अधिक की राशि हासिल की और इसे अपने रिश्तेदारों व चार्टर्ड अकाउंटेंट के नाम पर कई कंपनियों में निवेश किया।
सिंडिकेट के जरिए हुआ घोटाला
EOW की जांच में खुलासा हुआ कि अनवर ढेबर ने शराब घोटाले को अंजाम देने के लिए एक संगठित सिंडिकेट बनाया था। इस सिंडिकेट के माध्यम से घोटाले की रकम को विभिन्न कंपनियों में निवेश कर छिपाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी ने चालान पेश करने के बाद शासन ने इन 22 आबकारी अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।

निलंबित अधिकारियों की सूची
निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं:
- जनार्दन कौरव (50 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी)
- अनिमेष नेताम (49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी)
- विजय सेन शर्मा (48 वर्ष, उपायुक्त आबकारी)
- अरविंद कुमार पाटले (49 वर्ष, उपायुक्त आबकारी)
- प्रमोद कुमार नेताम (60 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- रामकृष्ण मिश्रा (36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- विकास कुमार गोस्वामी (44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- इकबाल खान (56 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी)
- नितिन खंडुजा (53 वर्ष, सहायक जिला आबकारी अधिकारी)
- नवीन प्रताप सिंग तोमर (43 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- मंजुश्री कसेर (47 वर्ष, सहायक आबकारी अधिकारी)
- सौरभ बख्शी (41 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- दिनकर वासनिक (42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- मोहित कुमार जायसवाल (46 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी)
- नीतू नोतानी ठाकुर (45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी
- गरीबपाल सिंह दर्दी (59 वर्ष, जिला आबकारी अधिकारी)
- नोहर सिंह ठाकुर (45 वर्ष, उपायुक्त आबकारी)
- सोनल नेताम (36 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- प्रकाश पाल (44 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- अलेख राम सिदार (34 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- आशीष कोसम (50 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
- राजेश जायसवाल (42 वर्ष, सहायक आयुक्त आबकारी)
जांच और कार्रवाई जारी
EOW की जांच में इस घोटाले के कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों और कारोबारियों ने मिलकर इस घोटाले को संगठित तरीके से अंजाम दिया। शराब घोटाले की रकम को छिपाने के लिए कई फर्जी कंपनियों का सहारा लिया गया। शासन द्वारा निलंबन की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में और सख्त कदम उठाए जाने की उम्मीद है। जांच अभी भी जारी है और आगे के खुलासों पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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