
छत्तीसगढ़ में नया नियम: 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक
भू-राजस्व संहिता में संशोधन, जियो रिफरेन्सिंग मैप को मिली मान्यता
रायपुर, 20 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक-2025 को पारित कर दिया। इस विधेयक के तहत अब 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधेयक पेश करते हुए बताया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के इस नियम को पलट दिया गया है, जिसके कारण अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ गई थी। इसके साथ ही जियो रिफरेन्सिंग आधारित डिजिटल मैप को कानूनी मान्यता दी गई है।
5 डिसमिल से कम भूमि की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने विधानसभा में बताया कि पूर्व में भाजपा सरकार के कार्यकाल में 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक थी। हालांकि, सरकार बदलने के बाद इस नियम में ढील दी गई, जिससे पूरे प्रदेश में अवैध प्लॉटिंग की समस्या बढ़ गई। इस संशोधन के जरिए अब दोबारा 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री पर रोक लगाई जा रही है। यह नियम केवल ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि पर लागू होगा, न कि शहरी क्षेत्रों की डायवर्टेड भूमि पर।
जियो रिफरेन्सिंग से खत्म होंगे सीमांकन विवाद
विधेयक में जियो रिफरेन्सिंग आधारित डिजिटल मैप को कानूनी मान्यता दी गई है। मंत्री वर्मा ने बताया कि पूरे प्रदेश में जियो रिफरेन्सिंग का कार्य चल रहा है, जिससे सीमांकन और बटांकन से जुड़े विवाद समाप्त होंगे।

इस डिजिटल मैप के जरिए भविष्य में नक्शा बंटवारा में किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका नहीं रहेगी। साथ ही, रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है।
बिल्डरों पर लगाम, फ्लैट खरीदारों को मिलेगा जमीन का अधिकार
संशोधन में कॉलोनी डेवलपर्स और बिल्डरों पर भी नकेल कसी गई है। अब तक बिल्डर फ्लैट बेचने के बाद सड़क, गार्डन या मनोरंजन स्थल के लिए छोड़ी गई जमीन को बेच देते थे या उस पर कॉम्पलेक्स बना देते थे। नए नियम के तहत फ्लैट खरीदारों को उनके फ्लैट के साथ 10 हजार वर्गफुट तक की जमीन सामानुपातिक रूप से उनके नाम पर दर्ज होगी। इससे खरीदारों को गार्डन, सड़क और अन्य साझा क्षेत्रों में हिस्सेदारी मिलेगी।
आवासहीन व्यक्तियों के लिए पट्टा अधिकार में बदलाव
राजस्व मंत्री ने छत्तीसगढ़ नगरीय क्षेत्रों के आवासहीन व्यक्ति को पट्टाधृति अधिकार (संशोधन) विधेयक-2025 भी पेश किया, जिसे पारित कर दिया गया। इस विधेयक के तहत नगरीय निकाय क्षेत्र में बीएलसी के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों की वार्षिक आय सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है। यह संशोधन आवासहीन व्यक्तियों को पट्टा अधिकार प्रदान करने में सहायता करेगा।
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