March 2, 2026
चंडीगढ़ फर्नीचर मार्केट पर बुलडोजर: 116 दुकानें ध्वस्त, दुकानदारों में आक्रोश

चंडीगढ़ फर्नीचर मार्केट पर बुलडोजर: 116 दुकानें ध्वस्त, दुकानदारों में आक्रोश

Jul 20, 2025

चंडीगढ़, 20 जुलाई 2025:

चंडीगढ़ की सबसे बड़ी फर्नीचर मार्केट में रविवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 116 दुकानों को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 2020 के ‘इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल’ फैसले के तहत की गई, जिसमें सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को अतिक्रमण माना गया है। इस कार्रवाई ने दुकानदारों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है, जो अपनी आजीविका के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

प्रशासन की कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन

प्रशासन के अनुसार, फर्नीचर मार्केट की दुकानें करीब 15 एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध रूप से चल रही थीं। यह जमीन वर्ष 2002 में सेक्टर-53, 54 और 55 के विकास के लिए अधिगृहीत की गई थी। इसमें कजहेड़ी, बड़हेड़ी और पलसौरा गांव की 227.22 एकड़ जमीन शामिल है। प्रशासन ने बताया कि जमीन मालिकों को मुआवजा और बढ़ा हुआ मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, अवैध कब्जेदारों को भूमि आवंटन में कोई प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

सुरक्षा व्यवस्था और Traffic Diversion

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। इलाके की सड़कों को अस्थायी रूप से बंद कर ट्रैफिक को डायवर्ट किया गया, ताकि कार्रवाई में कोई बाधा न आए। प्रशासन ने इस कार्रवाई से पहले 22 जून 2024 को दुकानदारों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में दुकानें खाली करने का निर्देश दिया था, लेकिन दुकानदारों द्वारा नोटिस का पालन न करने पर यह सख्त कदम उठाया गया।

दुकानदारों का गुस्सा: “हम मेहनतकश हैं, अतिक्रमणकारी नहीं”

प्रभावित दुकानदारों ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि वे 1986 से इस जगह पर कारोबार कर रहे हैं और यहीं से उनकी आजीविका चलती है। एक दुकानदार ने कहा, “हमने मेहनत से अपना कारोबार खड़ा किया। अगर हमें हटाना था, तो प्रशासन को पहले वैकल्पिक जगह देनी चाहिए थी।” दुकानदारों ने भूमि आवंटन में प्राथमिकता की मांग की थी, जिसे 9 जनवरी 2025 को एस्टेट ऑफिसर-कम-डीसी ने खारिज कर दिया था।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट के 2020 के ‘इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम मनोहरलाल’ फैसले में स्पष्ट किया गया है कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से व्यवसाय करने वाले अतिक्रमणकारी माने जाएंगे। ऐसे लोगों को न तो कोई प्राथमिकता दी जाएगी और न ही वैकल्पिक व्यवस्था का कोई प्रावधान होगा। इस फैसले के आधार पर ही चंडीगढ़ प्रशासन ने यह कार्रवाई की।

दुकानदारों का भविष्य अनिश्चित

इस कार्रवाई से सैकड़ों दुकानदारों की आजीविका पर संकट आ गया है। दुकानदारों का कहना है कि उनके पास अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। कई दुकानदारों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें कारोबार के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए कोई विशेष रियायत नहीं दी जा सकती।

आगे क्या?

इस कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की प्रक्रिया जारी रहेगी। वहीं, दुकानदार अब अपनी मांगों को लेकर कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर अतिक्रमण और आजीविका के बीच के टकराव को उजागर किया है।

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