
Chhattisgarh में बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में High Court का बड़ा फैसला
स्कूल फादर को उम्रकैद, दो महिला स्टाफ को 7-7 साल की सजा
बिलासपुर, 25 फरवरी 2026 – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरिया जिले के ज्योति मिशन स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (फास्ट ट्रैक कोर्ट) के 2017 के दोषमुक्त फैसले को पलटते हुए मुख्य आरोपी स्कूल फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही घटना को छिपाने वाली दो महिला स्टाफ सदस्यों को 7-7 वर्ष की कठोर कारावास की सजा दी गई है।
घटना का विवरण: 2015 में हॉस्टल में हुई थी दरिंदगी
मामला 9 सितंबर 2015 का है, जब सरभोका स्थित ज्योति मिशन स्कूल के हॉस्टल में रहने वाली चौथी कक्षा की 9 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म हुआ। पीड़िता ने बताया कि रात में बाथरूम जाने पर उसके ऊपर नशीला पाउडर छिड़का गया, जिससे वह बेहोश-सी हो गई। उसके बाद आरोपी ने उसके कमरे में आकर अपराध किया। सुबह छात्रा ने स्कूल की सिस्टर फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया से शिकायत की, लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाय उसे छड़ी से पीटा और चुप रहने की धमकी दी।

निचली अदालत ने बरी किया था, हाईकोर्ट ने कहा – फैसला त्रुटिपूर्ण
पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। 9 जनवरी 2017 को बैकुंठपुर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता के ठोस बयानों और मेडिकल साक्ष्यों को तकनीकी आधार पर खारिज कर गलत फैसला सुनाया।
मेडिकल और फॉरेंसिक साक्ष्य से साबित हुआ अपराध
हाईकोर्ट ने डॉ. कलावती पटेल की मेडिकल रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें पीड़िता के निजी अंगों पर गंभीर चोटें और सूजन की पुष्टि हुई। एफएसएल रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर मानव शुक्राणु मिले, जो अपराध की पुष्टि करते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बलात्कार के मामलों में पीड़िता की गवाही अपने आप में पूर्ण होती है और उसे किसी अन्य स्वतंत्र गवाह की जरूरत नहीं पड़ती।
सजाओं का विवरण
मुख्य आरोपी फादर जोसेफ धन्ना स्वामी को आईपीसी धारा 376(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद तथा 10,000 रुपये जुर्माना सुनाया गया।
सिस्टर फिलोमिना केरकेट्टा और किसमरिया को अपराध छिपाने और पीड़िता की मदद न करने के लिए आईपीसी धारा 119 के तहत 7-7 वर्ष कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
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