
CBI ने देवा पारधी हिरासत में मौत मामले में दो फरार पुलिस अधिकारियों पर इनाम घोषित किया
नई दिल्ली/गुना, 26 सितंबर 2025: मध्य प्रदेश के गुना जिले में 25 वर्षीय युवक देवा पारधी की हिरासत में रहस्यमयी मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को दो फरार आरोपी पुलिस अधिकारियों के बारे में विश्वसनीय जानकारी देने वाले व्यक्ति को 2-2 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया। ये अधिकारी मायना थाना प्रभारी संजीत सिंह मावई और सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) उत्तम सिंह कुशवाहा हैं, जो घटना के समय थाने में तैनात थे।

यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के कुछ घंटों बाद की गई है, जहां अदालत ने सीबीआई और मध्य प्रदेश सरकार को दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी में देरी के लिए फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और आर. महादेवन की पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान सीबीआई को एक महीने के अंदर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया और पीड़ित के चाचा गंगाराम की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया, जो मामले के एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी हैं।
घटना का विवरण: शादी के दिन गिरफ्तारी, फिर हिरासत में मौत
देवा पारधी, बिलाखेड़ी गांव के निवासी, 15 जुलाई 2025 को चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किए गए थे। बताया जाता है कि वे पड़ोस के गांव में अपनी शादी के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रात देर तक परिवार को जिला अस्पताल से सूचना मिली कि एक पारधी युवक का शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया है। अस्पताल पहुंचने पर परिवार को पता चला कि वह देवा ही था।
परिवार ने आरोप लगाया कि थाने में पूछताछ के दौरान देवा को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद, देवा की होने वाली पत्नी ने थाने के बाहर आत्महत्या का प्रयास किया और बाद में गुना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। देवा के चाचा गंगाराम भी उसी चोरी के मामले में गिरफ्तार थे और वे हिरासत में थे, लेकिन बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि गंगाराम की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि हिरासत में मौत का कोई दोहराव न हो।
सीबीआई जांच: तीन आरोपी गिरफ्तार, दो फरार
इस मामले की जांच मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश पुलिस से सीबीआई को सौंपी गई थी। एजेंसी ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की है: सब-इंस्पेक्टर देवराज सिंह परिहार, टाउन इंस्पेक्टर जुबैर खान और एक निजी व्यक्ति। हालांकि, संजीत सिंह मावई (तत्कालीन मायना थाना प्रभारी) और उत्तम सिंह कुशवाहा (तत्कालीन एएसआई) फरार हैं।
दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हो चुके हैं और अदालत ने उन्हें ‘घोषित अपराधी’ (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया है। सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश में कई प्रयास किए गए, लेकिन उनकी लोकेशन का पता नहीं चल सका। इसलिए, जनता से सहयोग लेने के उद्देश्य से प्रत्येक पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है। जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और सीबीआई के हेल्पलाइन या ईमेल के माध्यम से दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार: ‘देरी बर्दाश्त नहीं’
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीठ ने सीबीआई पर निशाना साधा। पीड़ित की मां द्वारा दायर अवमानना याचिका में कहा गया था कि 15 मई के आदेश का पालन नहीं हो रहा। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि फरार आरोपी एक महीने में गिरफ्तार नहीं हुए, तो सीबीआई के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, गंगाराम की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा गया, ‘हम हिरासत में मौत का दोहराव नहीं चाहते।’
यह मामला मध्य प्रदेश में हिरासत में मौतों की बढ़ती संख्या को उजागर करता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अनुसार, 2024-25 में राज्य में कई ऐसी घटनाएं दर्ज की गईं, जो पुलिस जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं।
व्यापक प्रभाव
देवा पारधी की मौत ने न केवल गुना बल्कि पूरे देश में हिरासत में मौतों के खिलाफ आक्रोश पैदा कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार संगठन सीबीआई की इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन वे कहते हैं कि इनाम से ज्यादा जरूरी है पुलिस प्रशिक्षण और निगरानी में सुधार। एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘यह इनाम फरारों को पकड़ने में मदद करेगा, लेकिन मूल समस्या हिरासत के दौरान यातना है।’
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