
CBI ने रिश्वतखोरी मामले में उत्तर Railway के उप मुख्य अभियंता सहित पांच को किया गिरफ्तार
कार्रवाई का विवरण
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने लखनऊ में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए उत्तर रेलवे की गति शक्ति इकाई के उप मुख्य अभियंता विवेक कुशवाहा सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई वाराणसी के भदोही में गति शक्ति योजना के तहत एक रेलवे परियोजना में कथित रिश्वतखोरी की जांच के दौरान की गई। गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों में वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (ड्राइंग) अशोक रंजन, कार्यालय अधीक्षक अंजुम निशा, और टेंजेंट इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के दो कर्मचारी, जिमी सिंह और प्रवीण कुमार सिंह शामिल हैं।
रिश्वतखोरी का आरोप
सीबीआई ने 14 जुलाई को दर्ज एक मामले के आधार पर यह कार्रवाई की, जिसमें आरोप है कि एक निजी कंपनी, जो रेलवे परियोजना पर काम कर रही थी, ने अनुकूल आधिकारिक कार्रवाई के बदले रिश्वत की पेशकश की। जांच में पता चला कि जिमी सिंह को विवेक कुशवाहा को 2.5 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके अतिरिक्त, अंजुम निशा और अशोक रंजन से 80,000 रुपये की रिश्वत बरामद की गई। एक सह-आरोपी, सहायक कार्यकारी अभियंता केके मिश्रा, जो कथित तौर पर 2.75 लाख रुपये की रिश्वत ले चुका है, अभी फरार है।
छापेमारी और साक्ष्य
गिरफ्तारी के बाद, सीबीआई ने लखनऊ में चार, वाराणसी में छह और गाजियाबाद में एक स्थान पर छापेमारी की। इन छापों के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री बरामद की गई, जो मामले को और मजबूत करते हैं। सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि यह जांच गति शक्ति योजना में भ्रष्टाचार की व्यापक शिकायतों के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में बिल स्वीकृति, विचलन स्वीकृति और परियोजना में अनुचित लाभ देने जैसे भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई
पांचों आरोपियों को मंगलवार को लखनऊ में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश (पश्चिम) की अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें 28 जुलाई तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7, 8, 9 और 10 के तहत दर्ज किया गया है। सीबीआई ने संकेत दिया है कि जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां या खुलासे हो सकते हैं।
व्यापक जांच
सीबीआई अब उत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के सिविल डिवीजन में कथित भ्रष्टाचार नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी पिछले एक साल में बिल स्वीकृति से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक दस्तावेजों की जांच कर रही है। यह कार्रवाई सार्वजनिक सेवा में अखंडता को मजबूत करने और सरकारी अनुबंधों के समय पर निष्पादन को सुनिश्चित करने की दिशा में सीबीआई की व्यापक नीति का हिस्सा है।
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