
CBI की गिरफ्त में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग CGPSC घोटाला 12 आरोपियों की कार्रवाई
रायपुर, 22 सितंबर 2025: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) से संबंधित एक बड़े घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और अन्य अभियुक्त शामिल हैं। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत की गई है, जिसमें इस घोटाले की गंभीरता और इसके व्यापक प्रभाव को दर्शाया गया है।
घोटाले का खुलासा
सीबीआई ने 2020 से 2022 के बीच हुए अनियमितताओं की जांच शुरू की थी। इस दौरान मालूम हुआ कि कई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर परीक्षा प्रक्रिया में हेराफेरी की, जिससे योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचा। इस घोटाले में शामिल लोगों ने नकल, गलत मूल्यांकन, और अनुचित तरीके से अंक प्रदान करने जैसे कदाचारों में लिप्त पाया गया।
प्रमुख आरोपी और उनकी भूमिका
जीवनलाल श्रीवास्तव: इस मामले के मुख्य अभियुक्त, जो सीजीपीएससी के वरिष्ठ अधिकारी थे। इन्हें कथित तौर पर इस घोटाले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है।
- निशा कोसले: दीपक अग्रवाल की पत्नी, जो इस घोटाले में अपने पति के साथ मिली थीं। इनका नाम नकलों और गलत मूल्यांकन में सामने आया।
- दीपक अग्रवाल: एक प्रभावशाली व्यक्ति, जो इस मामले में कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और अन्य उच्च पदों पर चयन प्रक्रिया में हेराफेरी के लिए जिम्मेदार पाया गया।
- ललित गणवीर: एक अन्य डिप्टी कलेक्टर, जिन्हें इस घोटाले में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया।
जांच और कार्रवाई
सीबीआई ने इस मामले की गहन जांच शुरू की, जिसमें कई अभियुक्तों के खिलाफ सबूत जुटाए गए। जांच में पाया गया कि नवंबर 2021 से जनवरी 2022 के बीच हुई परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। इन परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों, जैसे सोनवानी, बाजरंग पावर, और नंदकिशोर चावला, को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा, कुछ डिप्टी कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों ने भी इस षड्यंत्र में हिस्सा लिया।
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